( माननीय सर्वोच्च न्यायालय स्वत: संज्ञान ले , आरोपियों को सजा दे, अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ने जगह जगह से मांग उठायी)

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इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति राममनोहर नारायण मिश्रा द्वारा पोक्सो एक्ट के तहत एक नाबालिग बच्ची के मामले में दिया गया फैसले को अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति अल्मोड़ा ने बेहद आपत्तिजनक और महिला गरिमा को चोट पहुंचाने वाला है। उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट सुनीता पांडेय ने एक बयान जारी कर कहा,यह फ़ैसला बलात्कारियों के हौसले बुलन्द करेगा जिसका महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा ।‌

इस मामले नाबालिग पीड़िता के साथ तीन आरोपियों द्वारा बलात्कार का प्रयास किया गया और राह चलते चश्मदीदों के हस्तक्षेप के बाद आरोपी भाग गये । पीड़िता के स्वयं के बयानो में आया कि आरोपियों ने उसके गुप्तांगों अंगों को छुआ तथा उसे निर्वस्त्र करने की भी कोशिश की कासगंज विचारण न्यायालय में आरोपियों के ख़िलाफ़ बलात्कार का मुकदमा दर्ज किया था, जिसमें आरोपियों को सजा दी।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति मिश्रा ने विचारण न्यायालय के आदेश कोपलटकर इसे पोक्सो एक्ट के तहत छेड़खानी के मामले में दर्ज करने का आदेश दिया ।‌ जो कि असंवैधानिक है और बेहद आपत्ति जनक है ।पूर्व के निर्भया कांड के बाद गठित जे एस वर्मा कमेटी ने बलात्कार की व्यापक परिभाषा निर्धारित की थी। वर्मा कमेटी की सिफ़ारिशों में मैजिस्ट्रेट के समक्ष पीड़िता के बयान को पर्याप्त सबूत माना है।

माननीय सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने एक फ़ैसले में कहा था कि नाबालिग बच्ची के प्राइवेट पार्ट को ग़लत नीयत से छूना बलात्कार के तहत आयेगा । सर्वोच्च न्यायालय ने इस सम्बन्ध में बाॅम्बे हाईकोर्ट के फ़ैसले को पलटा था।

उच्च न्यायालय इलाहाबाद की न्याय मूर्ति मिश्रा कीसिंगल बेंच का यह फ़ैसला समाज में बच्चियों और महिलाओं के ख़िलाफ़ यौन हिंसा और असुरक्षा को बढ़ाएगा।

अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ने माँग की है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय इस फ़ैसले का स्वत: संज्ञान लें और ट्रायल कोर्ट के फ़ैसले के अनुसार ही आरोपियों को सज़ा मिले।

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