भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित योजना हार्टिकल्चर टेक्नोलॉजी मिशन की MIDH की Operational Guidelines के अनुसार योजना में किसानों को दिये जाने वाले निवेशों यथा फल पौध, दवा, खाद,सब्जी बीज, अदरक हल्दी लहसुन बीज आदि की उद्यान कार्ड में एन्ट्री का होना जरूरी है।
उद्यान विभाग में यह महत्वाकांक्षी योजना राज्य के सभी जनपदों में 2004-5 से चल रही है ।अभी तक कई किसानों के उद्यान कार्ड नहीं बने हैं यदि बने भी है तो उनमें अधिकांश निवेशों की एन्ट्री नहीं की जाती।हिमाचल प्रदेश में विगत दस वर्षों से योजनाओं में अनुदान पर मिलने वाले निवेशों की एन्ट्री उद्यान कार्ड में अनिवार्य (Mandatory) है।
अपने राज्य उत्तराखंड में किसानों का कहना है कि जो सामान योजनाओं में दिया जाता है एक रजिस्टर मे नाम लिख़ कर साइन लिए जाते है, फोन नम्बर भी लिए जाते है l क्या सामान दिया गया यह बाद मे लिखा जाता है l सामान कम दिया जाता है पर ज्यादा दिखाया जाता है l
अधिकतर सामान बाजार मे बैच दिया जाता है।एक रिपोर्ट -उद्यान कार्ड, बागवानों के लिए पंजीकरण का प्रमाण-पत्र होता है, इस कार्ड के ज़रिए बागवानों को उद्यान विभाग की योजनाओं का लाभ मिलता है।
उद्यान विभाग, बागवानों को योजनाओं में अनुदान पर फल पौध सब्जी बीज, अदरक हल्दी लहसुन बीज दवाइयां, स्प्रे मशीन आदि कई निवेश व उपकरण मुहैया कराता है योजनाओं में अनुदान पर मिलने वाले निवेशों का सम्बन्धित बागवान के उद्यान कार्ड में अंकित होना जरूरी है।भारत सरकार की योजनाओं जैसे -पर ड्राप मोर क्रॉप-माइक्रोइरीगेशन, एकीकृत बागवानी विकास मिशन (एम.आई.डी.एच.), राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, अनुसूचित जाति/जन जाति कृषकों के लिए औद्यानिक विकास योजनाओं के लिए उद्यान कार्ड आवश्यक होता है।
उद्यान कार्ड बनाने के लिए ज़रूरी दस्तावेज़-आधार कार्डखसरा-खतौनीबैंक पासबुक की पहली पेज की कॉपी लघु-सीमान्त कृषक (2 हेक्टेयर से कम ज़मीन वाले किसान) के लिए शपथ पत्र पंजीकरण के समय आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर ।जिन किसानों ने उद्यान कार्ड नहीं बनवाये है उनसे अनुरोध है कि वे अपने उद्यान सचल दल केन्द्र के प्रभारी से संपर्क कर अपना उद्यान कार्ड अवश्य बनवायें तथा योजनाओं के अन्तर्गत खरीदें गये/ प्राप्त निवेशों यथा फल पौध, सब्जी बीज, अदरक, हल्दी, लहसुन आलू बीज, दवा, खाद आदि सभी प्राप्त निवेशों की एन्ट्री उद्यान कार्ड में अवश्य करवाएं एवं उद्यान कार्ड अपने पास ही रखें इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता आयेगी ।हिमाचल प्रदेश में विगत दस वर्षों से योजनाओं में अनुदान पर मिलने वाले निवेशों की एन्ट्री उद्यान कार्ड में अनिवार्य (Mandatory) है। अपने राज्य उत्तराखंड में किसानों का कहना है कि जो सामान योजनाओं में दिया जाता है एक रजिस्टर मे नाम लिख़ कर साइन लिए जाते है, फोन नम्बर भी लिए जाते है l
क्या सामान दिया गया यह बाद मे लिखा जाता है l सामान कम दिया जाता है पर ज्यादा दिखाया जाता है l अधिकतर सामान बाजार मे बैच दिया जाता है।
उद्यान कार्ड में एन्ट्री होने से उद्यान विभाग की जबाव देही सुनिश्चित होगी साथ ही भविष्य में फल पौध बीज आदि निम्न स्तर निकलने पर किसान उपभोक्ता फोरम या नर्सरी एक्ट के तहत किसान अपना क्षति पूर्ति का दावा आसानी से कर सकते हैं।
उद्यान कार्ड में इन्ट्री न होने के कारण क्षति पूर्ति का दावा पेश करने में कठिनाइयां हो सकती है।अपनी जबाव देही से बचने हेतु उद्यान विभाग के कर्मचारी उद्यान कार्ड में एन्ट्री नहीं करते।


