(सिंचाई योजना सोलर पम्प जर्यूड़ा (दसौं), विकासखण्ड भैसियाछाना में रचा इतिहास ईंधन में खर्चा में भी कमी आयी।)

अल्मोड़ा/ जनपद अल्मोड़ा पर्वतीय भौगोलिक परिस्थितियों वाला क्षेत्र है, जहां सिंचाई व्यवस्था मुख्य रूप से वर्षा एवं सतही जल स्रोतों पर निर्भर रहती है। पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि भूमि का जल स्रोतों से ऊंचाई पर स्थित होना तथा विषम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कई स्थानों पर ग्रेविटी के माध्यम से खेतों तक पानी पहुंचाना संभव नहीं हो पाता है। ऐसे क्षेत्रों में सोलर सिंचाई योजना किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है‌विकासखण्ड भैसियाछाना के ग्राम जर्यूड़ा (दसौं) में स्थापित सोलर पम्प योजना इसका सफल उदाहरण है। योजना के निर्माण से पूर्व किसान वर्षा जल पर निर्भर रहते थे तथा सिंचाई के लिए वर्षभर पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो पाता था। इससे कृषि उत्पादन एवं किसानों की आय प्रभावित होती थी।
सोलर पम्प योजना के निर्माण के उपरान्त टैंक एवं पाइप लाइन के माध्यम से पर्याप्त पानी खेतों तक पहुंचाया जा रहा है। सौर ऊर्जा से संचालित पम्प के कारण सिंचाई के लिए डीजल, पेट्रोल अथवा विद्युत पर निर्भरता नहीं रहती, जिससे किसानों को संचालन संबंधी अतिरिक्त आर्थिक भार भी नहीं उठाना पड़ रहा है।योजना से वर्तमान में लगभग 4 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई की जा रही है तथा 12 परिवार प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हो रहे हैं। सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने से किसानों को कृषि कार्यों में सुविधा मिल रही है और उनकी आय में भी वृद्धि हो रही है।
इस सोलर सिंचाई योजना की कुल लागत 12.44 लाख रुपये है। योजना के माध्यम से स्थानीय किसानों को वर्षभर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के साथ-साथ कृषि उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान मिल रहा है।
सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई व्यवस्था पर्वतीय क्षेत्रों में टिकाऊ एवं कम लागत वाली सिंचाई का प्रभावी विकल्प बनकर उभर रही है। इससे जहां किसानों को सिंचाई की सुनिश्चित सुविधा मिल रही है, वहीं पारंपरिक ईंधन पर होने वाला खर्च भी कम हुआ है।

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