( स्मृति शेष सांई सेवक महाराज के प्रवचन का सार, स्मृति आधार पर)

स्वामी सांई सेवक महाराज


आज फागुन शुक्ल पक्ष द्वितीया ( फूलैरा दूज) का पर्व है। इस दिन का बृजमंडल में विशेष महत्व है, राधा कृष्ण की स्मृति में आज के दिन फूलों की होली खेली जाती है।,खेली भी क्यूं न जाय ऋतुराज बसंत भी तो अपने पूरे शबाब पर होता है इन दिनों मान्यता है कृष्ण भगवान ने आज के दिन राधा व गोपियों के साथ धूमधाम से फूलों की होली खेली थी।इसी वजह से होली की शुरुआत फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से होती है। इस दिन फुलेरा दूज का त्योहार मनाया जाता है।

पौराणिक कथा के अनुसार, फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण ने राधा रानी और गोपियों के संग फूलों की होली खेली थी। इस अवसर पर ब्रज के मंदिरों में खास रौनक देखने को मिलती है और मंदिरो को फूलों से सुंदर तरीके से सजाया जाता है। इस पर्व के दिन मथुरा और वृंदावन समेत पूरे ब्रज में बेहद उत्साह रहता है। इस वर्ष हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि की शुरुआत 18 फरवरी को दोपहर 04 बजकर 57 मिनट पर होगी। वहीं, तिथि का समापन 19 फरवरी को दोपहर 03 बजकर 58 मिनट पर होगी।


बृजमंडल में आज फूलैरा दूज धूमधाम से मनाई जा रही है।
फूलैरा दूज पर स्मृति शेष “सांई सेवक महाराज”, जिन्होंने श्री कैंची धाम में अपनी योग-साधना हेतु सांई कुटिया बनायी। स्वामी सांई सेवक महाराज कृष्ण भक्त थे और सांई बाबा को साधना गुरु बताते थे। तीस वर्ष पूर्व अल्मोड़ा में बसंत पंचमी के मौके पर सांई मंदिर की स्थापना की। प्रवचन का विषय “बसंत और कृष्ण ” रखा गया था। प्रवचन में बोले कृष्ण जो सब को प्रिय लगे वही कृष्ण है। बसंत पर बोले बसंत पर्व और फूलैरा दूज त्रेता युग से जुड़ा है।
लंका युद्ध में अनगिनत विधवा हुई।‌मर्यादा पुरूषोत्तम राम ने युद्ध में रावण परिवार के योद्धाओं का वध‌ किया।
युद्ध समाप्त हुआ विधवा मंडल पुरूषोत्तम राम के पास गयी। उन्होंने कहा ये राजा राम तुम्हारा विवाद तो रावण और योद्धाओं से था न, तो फिर हमें विधवा के रूप में कष्ट दारुण क्यों दिया।
नारायण हरि अपने वास्तविक स्वरूप में आ गये ,
“बोले यह विधि का विधान है, लेकिन द्वापर युग में कृष्ण के रूप में अवतरित होऊंगा और राधा का वियोग सहना पड़ेगा। लेकिन यह भी होगा राधा के साथ साथ तुम सभी गोपियां होंगी। और मैं रास लीला करूंगा ।आज के दिन ही फूलों की होली खेली गयी। ( यह है फागुन बसंत और कृष्ण के विषय में स्वामी सांई सेवक महाराज का प्रवचन ,यह सिर्फ विचार आलेख है, आलेख तक ही सीमित समझने का विनम्र निवेदन और आग्रह है)

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