उत्तराखंड सरकार ने हाल ही में आयुष्मान और गोल्डन कार्ड योजना के संचालन के तरीके में बड़े बदलाव किए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक (दिसंबर 2025) में इन योजनाओं को अब ‘इंश्योरेंस मोड’ और ‘हाइब्रिड मोड’ पर चलाने का निर्णय लिया गया है। यहाँ इस बदलाव से जुड़ी मुख्य बातें और नए नियम दिए गए हैं:
आयुष्मान योजना: अब 100% इंश्योरेंस मोड अटल आयुष्मान योजना के तहत अब इलाज का पूरा प्रबंधन बीमा कंपनियों के माध्यम से होगा।
भुगतान: अस्पतालों को इलाज का पैसा अब सीधे बीमा कंपनियां चुकाएंगी।
फायदा: इससे अस्पतालों के पेमेंट में होने वाली देरी कम होगी और मरीजों को भर्ती करने में अस्पताल आनाकानी नहीं करेंगे।
गोल्डन कार्ड: हाइब्रिड मोड में बदलाव राज्य के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए चलने वाली ‘गोल्डन कार्ड’ योजना अब ‘हाइब्रिड मोड’ पर चलेगी।
₹5 लाख तक का इलाज: इसका भुगतान बीमा कंपनी (Insurance Mode) करेगी।
₹5 लाख से ऊपर का इलाज: ₹5 लाख से अधिक का जो भी खर्च आएगा, उसे राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण (Trust Mode) वहन करेगा।
प्रीमियम (अंशदान) में बढ़ोतरी इस नए सिस्टम को लागू करने के लिए कर्मचारियों के मासिक अंशदान (Premium) में वृद्धि की गई है:
पुरानी दरों के मुकाबले अब कर्मचारियों को 225 रुपये से लेकर 450 रुपये तक अतिरिक्त देने होंगे।
प्रीमियम की राशि में लगभग 80% तक का इजाफा हुआ है।
इसे अब DA (महंगाई भत्ते) से भी जोड़ दिया गया है, यानी जैसे-जैसे DA बढ़ेगा, प्रीमियम में भी निश्चित प्रतिशत की वृद्धि होगी।
क्यों लिया गया यह फैसला?
पेमेंट की समस्या: अस्पतालों का करोड़ों रुपया बकाया था, जिससे वे कार्ड धारकों का इलाज करने में कतरा रहे थे। इंश्योरेंस मोड से पेमेंट प्रक्रिया तेज होगी।
बेहतर सुविधाएं: बीमा कंपनियों के जुड़ने से निजी अस्पतालों में इलाज मिलना आसान हो जाएगा।
पारदर्शिता: क्लेम सेटलमेंट में पारदर्शिता आएगी और फर्जी बिलों पर लगाम लगेगी।