नैनीताल। उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध बाबा नीब करौरी महाराज द्वारा स्थापित कैंची धाम में कथित वित्तीय अनियमितताओं और प्रबंधन की अव्यवस्थाओं का मामला अब कानूनी गलियारों में गूंज रहा है। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए स्वत: संज्ञान लिया है।

हाईकोर्ट का कड़ा रुख और नोटिस

​मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने पिथौरागढ़ निवासी ठाकुर सिंह डसीला के पत्र को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार किया। कोर्ट ने इस मामले में निम्नलिखित पक्षों को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं:

  • ​राज्य सरकार
  • ​जिलाधिकारी (DM), नैनीताल
  • ​उपजिलाधिकारी (SDM), कैंची धाम
  • ​मंदिर ट्रस्ट

​इसके साथ ही, अदालत ने मामले की निष्पक्ष जांच और सहयोग के लिए अधिवक्ता धर्मेंद्र बर्थवाल को नियुक्त किया है।

याचिका में उठाए गए मुख्य मुद्दे

​याचिकाकर्ता ने मंदिर के प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए ‘अघोषित लूट’ का आरोप लगाया है। प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • वित्तीय पारदर्शिता का अभाव: मंदिर में करोड़ों रुपये का नकद चढ़ावा आता है, लेकिन आय-व्यय का कोई सार्वजनिक विवरण उपलब्ध नहीं है। विदेशी श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए FCRA नियमों और ऑडिट रिपोर्ट के सार्वजनिक न होने पर सवाल उठाए गए हैं।
  • ट्रस्ट की गोपनीयता: प्रशासन और स्थानीय रजिस्ट्रार कार्यालय को भी यह स्पष्ट नहीं है कि मंदिर संचालित करने वाले ट्रस्ट का नाम क्या है और इसका पंजीकरण कहाँ हुआ है।
  • अव्यवस्थाएं: श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के बावजूद पीने के पानी और शौचालयों जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी का आरोप लगाया गया है।
  • सरकारी नियंत्रण की मांग: याचिका में मांग की गई है कि कैंची धाम को भी जागेश्वर और बद्री-केदारनाथ मंदिर समिति की तर्ज पर सरकारी निगरानी या वैधानिक व्यवस्था के तहत लाया जाए।

मंदिर के संचालकों का विवरण सरकारी अभिलेखों में उपलब्ध नहीं होना, धर्म और आस्था के नाम पर एक बड़ी साजिश और वित्तीय अपारदर्शिता की ओर इशारा करता है।”

याचिकाकर्ता ने मांग की है कि ट्रस्ट की ऑडिट रिपोर्ट, अचल संपत्ति का विवरण और स्थानीय ग्रामीणों द्वारा दान की गई भूमि का ब्योरा सार्वजनिक किया जाए। साथ ही, प्रबंधन में स्थानीय लोगों को भी शामिल करने का सुझाव दिया गया है। अब सभी की निगाहें सरकार और ट्रस्ट द्वारा चार सप्ताह बाद दाखिल होने वाले जवाब पर टिकी हैं।

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