गरमपानी: नए साल के अवसर पर विश्व प्रसिद्ध बाबा नीम करौली महाराज के दरबार, कैंची धाम में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन द्वारा किया गया रोड डायवर्जन आम जनता के लिए मुसीबत का सबब बन गया। जहाँ एक ओर श्रद्धालु दर्शन के लिए उत्साहित थे, वहीं दूसरी ओर स्थानीय निवासियों और रोजमर्रा के यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
लोकल यात्रियों पर भारी पड़ी ‘किलेबंदी’
प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाहनों को मुख्य मार्ग से हटाकर लंबे और वैकल्पिक रास्तों पर भेज दिया। इसका सबसे बुरा असर उन स्थानीय लोगों पर पड़ा जिन्हें अपने घर या पास के गांव तक जाना था। 5 से 10 किलोमीटर के सफर के लिए भी लोगों को 30-40 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर काटना पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन ने ‘लोकल’ यात्रियों के लिए कोई रियायत नहीं दी, जिससे वे अपने ही इलाके में बंधक जैसे महसूस करने लगे।
दोहरे किराए की मार और समय की बर्बादी
डायवर्जन के कारण सबसे अधिक मार गरीब और मध्यम वर्ग के यात्रियों पर पड़ी। रूट लंबा होने की वजह से टैक्सी और निजी वाहनों ने दोगुना किराया वसूलना शुरू कर दिया। कई यात्रियों के पास अतिरिक्त पैसे नहीं थे, जिसके कारण उन्हें बीच रास्ते में उतरकर पैदल चलने या घंटों इंतजार करने पर मजबूर होना पड़ा।
- समय की बर्बादी: 15 मिनट का सफर 2 से 3 घंटे में तब्दील हो गया।
- प्रशासनिक तालमेल की कमी: यात्रियों का आरोप है कि उन्हें पहले से डायवर्जन की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई थी।
जनता में भारी आक्रोश
क्षेत्रीय जनता ने प्रशासन के इस फैसले को अव्यवहारिक करार दिया है। लोगों का कहना है कि प्रशासन को भीड़ प्रबंधन के साथ-साथ स्थानीय परिवहन की सुचारू व्यवस्था पर भी ध्यान देना चाहिए था। बिना किसी बैकअप प्लान के रोड बंद कर देना प्रशासन की नाकामी को दर्शाता है।

















