गरमपानी। विश्व प्रसिद्ध नीम करौली बाबा के पावन धाम ‘कैंची धाम’ के आसपास लगने वाला भीषण जाम अब सिर्फ एक यातायात की समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह स्थानीय लोगों, व्यापारियों और युवाओं के भविष्य के लिए एक नासूर बन चुका है। शनिवार और रविवार की तो बात ही छोड़िए, अब सोमवार से लेकर इतवार तक हर रोज सुबह 5:00 बजे से ही सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो जा रही हैं, जो दिन चढ़ने के साथ-साथ और विकराल रूप ले लेती हैं।

परीक्षा छूटी, साल भर की मेहनत पर फिरा पानी


जाम का सबसे दर्दनाक पहलू शनिवार को देखने को मिला। उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) की परीक्षा के लिए अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और स्थानीय क्षेत्रों से हल्द्वानी जा रहे छात्र-छात्राएं इस महाजाम की जद में आ गए। अल्मोड़ा से सुबह 4:30 बजे ही टैक्सी से निकले कुछ सजग छात्रों ने बताया कि कैंची धाम से महज एक किलोमीटर पहले ही वे भारी जाम में फंस गए। परीक्षा छूटने के डर से कई छात्र-छात्राओं ने हिम्मत दिखाई और गाड़ियों से उतरकर पैदल ही सफर शुरू कर दिया।

कई किलोमीटर का सफर पैदल तय करने के बाद उन्होंने आगे से दूसरी टैक्सी बुक की और बमुश्किल परीक्षा केंद्र तक पहुंचे। कुछ छात्र तो ऐसे खुशकिस्मत रहे जो एंट्री बंद होने से महज 5 से 10 मिनट पहले केंद्र के भीतर घुस पाए।


लेकिन, हर किसी की किस्मत ने साथ नहीं दिया। कई ऐसे बदनसीब छात्र भी थे जो साल भर जी-तोड़ पढ़ाई करने के बावजूद इस जाम के कारण समय पर हल्द्वानी नहीं पहुंच सके और उनकी परीक्षा छूट गई। वहीं, कुछ छात्रों ने बताया कि शनिवार के खौफनाक जाम का अंदाजा होने के कारण वे एक दिन पहले ही हल्द्वानी के लिए रवाना हो गए थे, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा।

बच्चों की पढ़ाई प्रभावित, स्थानीय प्रशासन मौन


जाम का असर केवल प्रतियोगी परीक्षाओं तक सीमित नहीं है। खैरना और गरमपानी क्षेत्र से जो स्कूली बच्चे भवाली पढ़ने जाते हैं, वे शनिवार को स्कूल जाने की हिम्मत ही नहीं जुटा पा रहे हैं। इस कारण स्थानीय नौनिहालों की शिक्षा पर बेहद बुरा असर पड़ रहा है। गरमपानी और खैरना के व्यापारियों का आरोप है कि उन्होंने इस गंभीर समस्या को लेकर कई बार उपजिलाधिकारी (SDM) और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत कराया है, लेकिन शासन-प्रशासन की नींद टूटने का नाम नहीं ले रही है। अधिकारियों की यह लापरवाही अब साफ तौर पर दिखाई देने लगी है।

व्यापारियों और होटल कारोबारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट


स्थानीय होटल स्वामियों, टैक्सी चालकों और छोटे व्यापारियों की स्थिति बेहद दयनीय हो चुकी है। होटल कारोबारियों का कहना है कि जब कैंची धाम में जाम हद से ज्यादा बढ़ जाता है, तो पुलिस प्रशासन बिना सोचे-समझे रूट को डायवर्ट (मार्ग परिवर्तित) कर देता है। इस डायवर्जन के कारण गरमपानी और खैरना बाजार में शनिवार और इतवार को व्यापारिक गतिविधियां पूरी तरह शून्य हो जाती हैं।

व्यापारियों ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, “हम अपने परिवार का खर्च कैसे निकालें? हमने व्यापार के लिए बैंकों से भारी-भरकम लोन लिया है। अगर यही आलम रहा तो हम बैंक की किस्त (EMI) चुकाना तो दूर, अपने होटलों और दुकानों में काम करने वाले कर्मचारियों को तनख्वाह तक नहीं दे पाएंगे।”


जनता के सुझाव: तिरछी खड़ी गाड़ियों पर हो क्रेन और चालान की सख्त कार्रवाई
प्रशासनिक नाकामी से नाराज स्थानीय जनता और व्यापारियों ने खुद ही इस समस्या से निपटने के लिए व्यावहारिक सुझाव दिए हैं। लोगों का कहना है कि जो भी सैलानी या वाहन चालक रात के समय या दिन में सड़कों के किनारे आड़े-तिरछे वाहन पार्क कर देते हैं, उनके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाए।


स्थानीय लोगों की मांग है कि:
सड़कों को बाधित करने वाले वाहनों को तुरंत क्रेन (ट्रेन) की मदद से उठाकर दूसरी जगह डाला जाए।


नियमों का उल्लंघन करने वालों का इतना भारी चालान काटा जाए कि अगली बार कोई भी हाईवे पर गाड़ी खड़ी करने की हिम्मत न करे।


जब तक प्रशासन स्थानीय जनता के हितों को ध्यान में रखकर ठोस और स्थाई ट्रैफिक प्लान लागू नहीं करता, तब तक बाबा के धाम से आस्था का संदेश कम और आम जनता की चीखें ज्यादा सुनाई देती रहेंगी।

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