गरमपानी। विश्व प्रसिद्ध नीम करौली बाबा के धाम, ‘कैंची धाम’ में उमड़ रही श्रद्धालुओं की अपार भीड़ अब आसपास के क्षेत्रों के लिए वरदान के बजाय अभिशाप साबित हो रही है। प्रत्येक शनिवार और रविवार को स्थिति यह हो जाती है कि कैंची धाम में जहां पैर रखने की जगह नहीं बचती, वहीं उससे महज कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित गरमपानी, खैरना, छड़ा और चमड़िया के बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ है।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि सुबह 4:00 बजे से ही ट्रैफिक रेंगना शुरू कर देता है। जब जाम अनियंत्रित हो जाता है, तो प्रशासन आनन-फानन में वाहनों का रूट डायवर्जन कर देता है। इसका सीधा असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। पर्यटक इन बाजारों तक पहुंच ही नहीं पा रहे हैं, जिससे होटल, रेस्टोरेंट और स्थानीय हस्तशिल्प का कारोबार पूरी तरह ठप हो गया है। व्यापारियों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि “प्रशासन के पास इस जाम से निपटने के लिए कोई ठोस विकल्प नहीं है।”
जाम का असर केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अखबार और दूध जैसी बुनियादी जरूरतों वाली गाड़ियां भी घंटों जाम में फंसी रहती हैं, जिससे दैनिक जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। आपातकालीन सेवाओं के लिए भी यह जाम एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
आम नागरिक और व्यापारी दोनों ही प्रशासन की कार्यप्रणाली से असंतुष्ट हैं। लोगों का तर्क है कि हर हफ्ते की इस समस्या के बावजूद पार्किंग और ट्रैफिक मैनेजमेंट की कोई दीर्घकालिक योजना नहीं दिख रही है। यदि यही स्थिति रही, तो कैंची धाम के आगे के बाजारों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।

















