आज दिनांक 25 जून, 2026 को गोविन्द बल्लभ पन्त राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान, कोसी-कटारमल, अल्मोड़ा में वैज्ञानिक सलाहकार समिति (SAC) की 34 वी समीक्षा बैठक हुई. यह बैठक प्रतिवर्ष संस्थान द्वारा वर्षभर किये गए शोध एवं विकास गतिविधियों की समीक्षा हेतु आयोजित की जाती है.

बैठक की शुरुआत संस्थान के प्रभारी निदेशक डा० आई०डी० भट्ट के स्वागत उदबोधन से हुई. अपने उदबोधन में डा० आई०डी० भट्ट ने वैज्ञानिक सलाहकार समिति के अध्यक्ष, समिति के विषयगत विशेषज्ञों, पर्यावरण संस्थान के वैज्ञानिकों और बैठक में उपस्थित सभी लोगों का स्वागत किया तथा सबको संस्थान एवं इसके क्षेत्रीय केन्द्रों द्वारा हिमालयी क्षेत्रों में किये जा रहे विभिन्न शोध एवं विकास सम्बंधित कार्यों पर एक पॉवर पॉइंट प्रस्तुतीकरण दिया. उन्होंने संस्थान के व्यापक उदेश्यों, विषयगत केन्द्रों, अनुसंधान और विकास की प्राथमिकताओं, विकासात्मक विकल्पों, कार्यक्रमों तथा संस्थान की उपलब्धियों के बारे में विस्तार से बताया.

अपने अध्यक्षीय संबोधन में वैज्ञानिक सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो० डी०एस० रावत, कुलपति, कुमाऊँ विश्वविध्यालय, नैनीताल ने पर्यावरण संस्थान के प्रभारी निदेशक डा० आई०डी० भट्ट सहित वैज्ञानिक सलाहकार समिति के सभी विषयगत विशेषज्ञों तथा संस्थान के सभी वैज्ञानिकों का धन्यवाद किया. उन्होंने विगत वर्षों के दौरान संस्थान द्वारा किये गए शोध और विकास कार्यो की सराहना की. इसके लिए उन्होंने संस्थान के वैज्ञानिकों तथा शोधार्थियों को बधाई दी. उन्होंने हिमालयी क्षेत्र के प्रमुख मुद्दों मुख्य रूप से जैव विविधता संरक्षण एवं संवर्धन पर गहन विचार विमर्श कर हिमालय के विकास और उन्नति के लिए भविष्य के लक्ष्य निर्धारित करने की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने हिमालयी क्षेत्र में पायी जाने वाली बहुमूल्य प्राकृतिक सम्पदा के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु संस्थान से कार्य करने की आवश्कता पर बल दिया.

कार्यक्रम में विशिष्ठ अतिथि के रूप में आमंत्रित पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार की संयुक्त सचिव सुश्री नमिता प्रसाद ने भी संस्थान द्वारा किये जा रहे विभिन्न शोध एवं विकास कार्यों की सराहना की.

बैठक के द्वितीय सत्र में संस्थान के विभिन्न उत्कृष्टता केन्द्रों द्वारा संचालित प्रमुख आंतरिक अनुसंधान परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। इनमें भूमि एवं जल संसाधन प्रबंधन केन्द्र, पर्यावरण मूल्यांकन एवं जलवायु परिवर्तन केन्द्र, सामाजिक-आर्थिक विकास केन्द्र तथा जैव विविधता संरक्षण एवं प्रबंधन केन्द्र की परियोजनाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा हुई। समिति के सदस्यों ने अनुसंधान की गुणवत्ता, क्षेत्रीय उपयोगिता तथा भविष्य की कार्ययोजना के संबंध में महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

दोपहर के सत्र में संस्थान के लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, गढ़वाल, सिक्किम तथा उत्तर-पूर्व क्षेत्रीय केन्द्रों के साथ-साथ माउंटेन डिवीजन एवं ग्रामीण प्रौद्योगिकी केन्द्रों के माध्यम से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण कार्यक्रमों की उपलब्धियों एवं प्रगति की समीक्षा की गई। विभिन्न केन्द्रों द्वारा स्थानीय समुदायों के सतत विकास, प्राकृतिक संसाधन संरक्षण तथा आजीविका संवर्धन के लिए किए जा रहे कार्यों पर समिति ने संतोष व्यक्त किया।

प्रस्तुतिकरणों के पश्चात वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक में समिति के अध्यक्ष प्रो० डी०एस० रावत तथा अन्य सभी विषयगत विशेषज्ञों द्वारा संस्थान की वार्षिक रिपोर्ट का अनुमोदन तथा पिछली बैठक में समिति द्वारा दिये गए सुझाओ पर कार्यवाही रिपोर्ट का आकलन किया गया. प्रस्तुतीकरण के पश्चात वैज्ञानिकों तथा वैज्ञानिक सलाहकार समिति के सदस्यों के मध्य गहन विचार विमर्श किया गया तथा आगामी वर्षों के लिए अनुसंधान की प्राथमिकताओं, नवाचार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण एवं हिमालयी क्षेत्र के सतत विकास हेतु भावी रणनीतियों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

कार्यक्रम के अंत में समिति के सदस्यों ने संस्थान की प्रयोगशालाओं एवं अन्य अनुसंधान सुविधाओं का अवलोकन किया। इसके उपरांत संस्थान परिसर स्थित सूर्यकुंज में “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के अंतर्गत पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें समिति के सदस्यों एवं संस्थान के वैज्ञानिकों ने सहभागिता करते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

वैज्ञानिक सलाहकार समिति की इस बैठक में समिति के अध्यक्ष प्रो० डी०एस० रावत, कुलपति, कुमाऊँ विश्विद्यालय, नैनीताल, विशिष्ठ अतिथि, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार की संयुक्त सचिव सुश्री नमिता प्रसाद, डा० एस०पी० सुबुद्धि, निदेशक, राज्य जैव विविधता बोर्ड, उत्तराखंड, सलाहकार समिति के विषयगत विशेषज्ञ प्रो० अनिल के० गुप्ता, डिवीज़न हेड, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ डिजास्टर मैनेजमेंट, नई दिल्ली, प्रो० आर० उमा शंकर, इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, जम्मू कश्मीर, डॉ. कनाड दास, निदेशक, भारतीय वानस्पतिक सर्वेक्षण, कोलकाता, डा० पूर्वजा रामचंद्रन, निदेशक, नेशनल सेंटर फॉर सस्टेनेबल कोस्टल मैनेजमेंट, चेन्नई, डा० ललित शर्मा, वैज्ञानिक, जूलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया, कोलकाता, नीरजा शर्मा, डा० सुसान जॉर्ज के०, साइंटिस्ट इंचार्ज, माउंटेन डिवीज़न उपस्थित रहे.

इस बैठक में संस्थान के वैज्ञानिक सलाहकार समिति के सदस्य डा० संदीपन मुखर्जी तथा डा० शिवरंजिनी एस० सहित संस्थान के केंद्र प्रमुखों डा० आई०डी० भट्ट, ई० आर० के० सिंह, ई० महेंद्र सिंह लोधी, डा० राजेश जोशी, डा० के० चन्द्रशेखर, सहित संस्थान मुख्यालय एवं क्षेत्रीय केन्द्रों के समस्त वैज्ञानिकों, तकनीकी अधिकारियों द्वारा ऑनलाइन एवं ऑफलाइन मोड से प्रतिभाग किया गया. बैठक का समापन संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक ई० आर० के० सिंह के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ.

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