छत्तीसगढ़ में बिना सहमति 25 सिम एक्टिवेट करने वाले एजेंट पर कार्रवाई; DoT ने जारी की चेतावनी
नई दिल्ली: दूरसंचार विभाग (DoT) ने मोबाइल सिम कार्ड के दुरुपयोग, जाली दस्तावेजों के उपयोग और मोबाइल के IMEI नंबर से छेड़छाड़ को लेकर नागरिकों को सतर्क किया है। विभाग ने टेलीकॉम आइडेंटिफायर्स के दुरुपयोग को गंभीर अपराध बताते हुए चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने पर 3 साल तक की जेल और ₹50 लाख तक का जुर्माना हो सकता है।
छत्तीसगढ़ में उजागर हुआ फर्जीवाड़ा
हाल ही में छत्तीसगढ़ में सिम धोखाधड़ी का एक मामला सामने आया, जहाँ एक प्वाइंट ऑफ सेल (PoS) एजेंट ने नागरिकों की जानकारी या सहमति के बिना उनके पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल करके 25 मोबाइल सिम जारी कर दिए थे। मामला सामने आने पर विभाग ने संबंधित एजेंट को तुरंत ब्लैकलिस्ट कर दिया। इसके बाद डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DIP) के जरिए जांच कर फर्जी पाए गए सभी नंबरों को री-वेरिफिकेशन प्रक्रिया में विफल होने पर निष्क्रिय (डीएक्टिवेट) कर दिया गया।
बदलें IMEI और जाली दस्तावेजों से रहें दूर
दूरसंचार विभाग ने स्पष्ट किया है कि नागरिक किसी भी ऐसे मोबाइल फोन, मॉडम, सिम बॉक्स या उपकरण का इस्तेमाल न करें, जिनके IMEI नंबर में बदलाव या छेड़छाड़ की गई हो। इसके अलावा फर्जी दस्तावेजों, धोखाधड़ी या दूसरों के नाम पर फर्जी तरीके से सिम लेने पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अपना सिम दूसरों को देना पड़ेगा भारी
अपने नाम पर जारी मोबाइल सिम किसी अन्य व्यक्ति को बेचना, किराए पर देना या ‘म्यूल सिम’ के तौर पर इस्तेमाल के लिए देना कानूनी संकट पैदा कर सकता है। यदि उस सिम कार्ड का उपयोग किसी साइबर अपराध या गैरकानूनी गतिविधि में होता है, तो उसकी सीधी कानूनी जिम्मेदारी मूल सिम धारक पर भी आएगी।
‘संचार साथी’ पोर्टल से करें अपने नंबरों की जांच
नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे समय-समय पर यह जांचते रहें कि उनके नाम पर कुल कितने मोबाइल कनेक्शन सक्रिय हैं। इसके लिए सरकार के संचार साथी पोर्टल (sancharsaathi.gov.in) या मोबाइल ऐप का उपयोग किया जा सकता है। यदि लिस्ट में कोई ऐसा नंबर दिखता है जिसे आपने जारी नहीं कराया है, तो उसकी रिपोर्ट दर्ज कराकर उसे तुरंत ब्लॉक कराया जा सकता है।

















