( कांग्रेस नेताओं ने काले झंडे दिखाए, युवा कांग्रेस नेता हुए गिरफ्तार)


प्रदेश मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के के दन्या दौरे के दौरान राजनीतिक माहौल गरमा गया। युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री को काले झंडे दिखाकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान “मुख्यमंत्री गो बैक” के नारे भी लगाए गए। विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस ने युवा कांग्रेस के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया, जिसके बाद कांग्रेस ने सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का आरोप लगाया है।

गिरफ्तार किए गए नेताओं में युवा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गोपाल भट्ट, जिला अध्यक्ष विक्रम सिंह फर्त्याल, प्रदेश महासचिव प्रदीप बिष्ट, विधानसभा अध्यक्ष युवा कांग्रेस जागेश्वर वीरेंद्र सिंह मलाडा, ब्लॉक अध्यक्ष राजकमल, रोहित पंत, गौरव सतवाल सहित अन्य कार्यकर्ता शामिल रहे।युवा कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उत्तराखंड की भाजपा सरकार युवाओं के हितों की रक्षा करने में पूरी तरह असफल साबित हुई है। संगठन के अनुसार प्रदेश में लगातार भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं और पेपर लीक की घटनाओं ने युवाओं का भविष्य अंधकारमय कर दिया है।

सरकार युवाओं को जवाब देने के बजाय उनकी आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। प्रदेश का युवा आज रोजगार, शिक्षा और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था की मांग कर रहा है, लेकिन सरकार इन सवालों का जवाब देने के बजाय आंदोलनकारियों को गिरफ्तार कर रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि धामी सरकार युवाओं के प्रश्नों से घबराई हुई है और लोकतांत्रिक विरोध को भी बर्दाश्त नहीं कर पा रही है। यदि सरकार ने समय रहते भर्ती प्रक्रियाओं को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाया होता, पेपर लीक माफिया पर कठोर कार्रवाई की होती तथा युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया होता, तो आज प्रदेशभर में युवाओं में इतना आक्रोश नहीं होता।

युवा कांग्रेस नेताओं ने सरकार से पूछा कि आखिर पेपर लीक के दोषियों को संरक्षण क्यों दिया जा रहा है? भर्ती घोटालों में शामिल लोगों पर कठोर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? प्रदेश का युवा लगातार बेरोजगारी का सामना कर रहा है, लेकिन सरकार इस विषय पर स्पष्ट नीति क्यों नहीं बना पा रही? महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर सरकार की जवाबदेही कौन तय करेगा?


उत्तराखंड में बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार, खराब सड़कें और शिक्षा व्यवस्था की बदहाली जैसे मुद्दे लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। इसके बावजूद सरकार इन समस्याओं के समाधान के बजाय केवल अपनी छवि सुधारने में लगी हुई है।गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा गिरफ्तारियां उनके आंदोलन को कमजोर नहीं कर सकतीं।

संगठन आने वाले समय में गांव-गांव जनजागरण अभियान चलाएगा और युवाओं के अधिकारों की लड़ाई को और तेज करेगा। नेताओं ने राजधानी कूच सहित बड़े जनआंदोलनों की भी चेतावनी दी।

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