गरमपानी । उत्तराखंड सरकार के ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ जैसे महत्वाकांक्षी अभियान और जिला प्रशासन के कड़े निर्देशों के बावजूद गरमपानी क्षेत्र की बदहाली दूर होने का नाम नहीं ले रही है। अल्मोड़ा-हल्द्वानी नेशनल हाईवे पर स्थित प्रमुख व्यापारिक केंद्र गरमपानी में सार्वजनिक शौचालय पिछले कई वर्षों से बंद पड़ा है। इस उदासीनता का आलम यह है कि क्षेत्र में आने वाले यात्री और स्थानीय लोग मुख्य सड़क किनारे ही पेशाब करने को मजबूर हैं, जिससे न केवल स्वच्छता अभियान की धज्जियां उड़ रही हैं, बल्कि पर्यावरण भी प्रदूषित हो रहा है।

डीएम के आदेश भी बेअसर


स्थानीय व्यापारियों और जागरूक नागरिकों ने इस समस्या को लेकर शासन-प्रशासन के हर स्तर पर गुहार लगाई है। हाल ही में ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी (डीएम) के समक्ष भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था। व्यापारियों की शिकायत पर डीएम ने तत्काल संज्ञान लेते हुए संबंधित विभाग को शौचालय दुरुस्त कर जनता के लिए खोलने के सख्त आदेश दिए थे। लेकिन विडंबना देखिए कि आदेश के बाद भी धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।

महिलाओं के लिए बनी बड़ी मुसीबत


शौचालय बंद होने का सबसे बुरा असर महिला यात्रियों पर पड़ रहा है। हाईवे पर सफर करने वाली महिलाओं के पास कोई अन्य विकल्प न होने के कारण उन्हें भारी मानसिक और शारीरिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि वे कई बार उच्चाधिकारियों से लिखित शिकायत कर चुके हैं, लेकिन आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं मिला।

खुले में पेशाब से बढ़ रही गंदगी


शौचालय बंद होने के कारण पुरुष यात्री सड़क किनारे और झाड़ियों के पास पेशाब करने को विवश हैं। इससे पूरे क्षेत्र में दुर्गंध फैली रहती है और यह पर्यटन की दृष्टि से भी प्रदेश की छवि को धूमिल कर रहा है।

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