एक महीने से चल रहा आंदोलन दूसरे दिन भी दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर दिखा; DND और चिल्ला बॉर्डर पर भीषण जाम से लोग बेहाल।


नई दिल्ली: देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली, पेपर लीक की घटनाओं और शिक्षा व्यवस्था में बुनियादी सुधार की मांग को लेकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में माहौल गरमाया हुआ है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आह्वान पर जंतर-मंतर पर पिछले एक महीने से चल रहा धरना-प्रदर्शन सोमवार को अचानक उग्र हो गया। सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई तीखी झड़प के बाद सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मंगलवार को भी अपना ‘संसद मार्च’ जारी रखने का बड़ा ऐलान किया है।
इस आंदोलन की आंच अब सीधे तौर पर आम जनता और दिल्ली-एनसीआर के यातायात पर पड़ने लगी है।

दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर महाजाम, यात्री बेहाल

सीजेपी के दिल्ली में जारी विरोध-प्रदर्शन और संसद मार्च के आह्वान का व्यापक असर मंगलवार को लगातार दूसरे दिन भी दिल्ली-नोएडा सीमाओं पर देखने को मिला।

  • DND और चिल्ला बॉर्डर पर कतारें: मंगलवार तड़के से ही दिल्ली-नोएडा को जोड़ने वाले प्रमुख मार्गों—डीएनडी (DND) फ्लाईवे और चिल्ला बॉर्डर—पर वाहनों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लग गईं।
  • सघन चेकिंग अभियान: दिल्ली पुलिस द्वारा सीमाओं पर बैरिकेडिंग बढ़ाने और हर वाहन की गहन जांच करने के कारण यातायात की रफ्तार पूरी तरह थम गई।
  • दफ्तर जाने वाले लोग परेशान: सुबह पीक आवर्स के दौरान ऑफिस जाने वाले कामकाजी लोगों, एम्बुलेंस और जरूरी सेवाओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। गाड़ियां घंटों रेंग-रेंग कर चलती रहीं।

“सुबह 8 बजे नोएडा से निकला था, लेकिन DND बॉर्डर पार करने में ही दो घंटे से ज्यादा का समय लग गया। छात्रों की मांगें अपनी जगह सही हो सकती हैं, लेकिन सड़क पर फंसे आम नागरिकों के लिए यह स्थिति बेहद पीड़ादायक है।”
रवि शर्मा, दैनिक यात्री

सोमवार को क्यों भड़की हिंसा?

जंतर-मंतर पर बीते 30 दिनों से शांतिपूर्ण ढंग से सत्याग्रह कर रहे सीजेपी कार्यकर्ताओं और छात्रों का सब्र सोमवार को जवाब दे गया। जब हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन की ओर रुख करने का प्रयास किया, तो पुलिस ने भारी बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया। इसके बाद दोनों पक्षों में धक्का-मुक्की हुई और माहौल तनावपूर्ण हो गया।
प्रदर्शन की कमान संभाल रहे सीजेपी प्रमुख अभिजीत दीपके ने कहा:
“लाखों युवाओं का भविष्य अंधकार में है। जब तक सरकार हमारी मांगों को सुनकर ठोस कदम नहीं उठाती और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं करती, तब तक हमारा संसद मार्च और आंदोलन अनवरत जारी रहेगा।”

क्या हैं सीजेपी की प्रमुख मांगें?

  1. पेपर लीक रोधी सख्त कानून: राष्ट्रीय स्तर पर सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त प्रणाली लागू की जाए।
  2. परीक्षा एजेंसियों का पुनर्गठन: परीक्षा आयोजित कराने वाली संस्थाओं की जवाबदेही तय हो और दोषियों पर फास्ट-ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चले।
  3. शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: हालिया परीक्षा अनियमितताओं की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री अपने पद से इस्तीफा दें।

आगे क्या?

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने यात्रियों को परामर्श जारी करते हुए कालिंदी कुंज या आनंद विहार मार्गों का उपयोग करने की सलाह दी है। राजधानी के लुटियंस जोन और संसद मार्ग के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है। सीजेपी के अड़े रहने के रुख को देखते हुए आने वाले दिनों में दिल्ली-एनसीआर में प्रशासनिक और यातायात चुनौतियां और बढ़ने के आसार हैं।

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