नई दिल्ली: देशभर में NEET-UG परीक्षा में हुई धांधली और जंतर-मंतर पर छात्रों के भारी विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है। अपने त्यागपत्र में उन्होंने चार दशकों के अपने छात्र व शिक्षक जीवन, नीट परीक्षा की गड़बड़ियों, जांच प्रक्रिया और देश के युवाओं की आकांक्षाओं का उल्लेख करते हुए एक भावुक संदेश लिखा है।
‘चार दशकों से शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के लिए रहा समर्पित’
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे में लिखा कि वे पिछले चार दशकों से अधिक समय से छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा सुधारों के लिए समर्पित रहे हैं। उन्होंने कहा:
“मेरा सदैव यह विश्वास रहा है कि यह सशक्त, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला होती है। मैं देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और उनकी न्यायोचित अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करता हूं।”
उन्होंने आगे कहा कि युवा पीढ़ी के सपनों को साकार करना सामाजिक व राजनीतिक जीवन का नैतिक संकल्प है। साथ ही, उन्होंने देश सेवा का अवसर देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया।
NEET-UG परीक्षा, CBI जांच और CBT मोड में बदलाव का जिक्र
नीट परीक्षा विवाद पर अपना पक्ष रखते हुए उन्होंने लिखा कि 3 मई को हुई NEET-UG परीक्षा में अनियमितताएं सामने आते ही सरकार ने त्वरित कार्रवाई की। मामले की जांच सीबीआई (CBI) को सौंपी गई, परीक्षा रद्द की गई और नई तिथि घोषित की गई।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए अगले वर्ष से इस परीक्षा को कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT Mode) में आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। राज्य सरकारों और जिला प्रशासन के सहयोग से 21 जून को पुनः परीक्षा सफलतापूर्वक संपन्न कराई गई।‘नैतिक जिम्मेदारी से कभी मुंह नहीं मोड़ा, लेकिन भ्रामक माहौल से दुखी’
इस्तीफे में प्रधान ने कहा कि उन्होंने पहले ही दिन से इस घटनाक्रम की पूरी जिम्मेदारी ली। उनका संकल्प था कि परीक्षा माफिया के कारण किसी भी मेधावी छात्र का नुकसान न हो। 16 जुलाई को घोषित नतीजों में गरीब पृष्ठभूमि के कई छात्रों को सफलता मिली, लेकिन कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे व्यक्तियों ने छात्रों को गुमराह करने और बाधा डालने का प्रयास किया।
राष्ट्रविरोधी ताकतों और कानूनी अड़चनों से छात्रों को बचाने का संकल्प
जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन का जिक्र करते हुए उन्होंने लिखा कि पिछले 10 दिनों की घटनाओं से उनका मन अत्यंत व्यथित था। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की युवा शक्ति को भ्रम के कुचक्र में नहीं फंसने दिया जाएगा। वे नहीं चाहते कि जंतर-मंतर की स्थिति का कोई राष्ट्रविरोधी तत्व अनुचित लाभ उठाए या विद्यार्थियों का समय कानूनी दांव-पेचों में बर्बाद हो। इसी सोच के साथ उन्होंने अपना त्यागपत्र सौंपने का फैसला किया ताकि छात्र अपनी पढ़ाई और करियर पर ध्यान केंद्रित कर सकें।

















