उत्तराखण्ड़ लोक वाहिनी की बैठक में उत्तराखण्ड़ की विधानसभा में पहाड़- मैदान को लेकर “अभद्र टिप्पणी “करने वाले पूर्व मन्त्री प्रेम चन्द्र अग्रवाल के त्यागपत्र को देर से उठाया गया एक कदम बताया गया साथ ही अमर्यादित आचरण करने वाले पूर्व मन्त्री के समर्थन में उत्तराखण्ड़ में सत्ताधारी पार्टी के अध्यक्ष महेन्द्र भट्ट तथा विधानसभा अध्यक्ष रितु खण्डूरी के रवैय्ये की भी आलोचना की गई. बैठक में उत्तराखण्ड़ में पहाड़ बनाम मैदान की राजनीति की तीव्र निन्दा की गई.
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि एक ओर उत्तराखण्ड़ सरकार समान नागरिक संहिता लागू करने की बात करती है दूसरी ओर भू -कानून में मैदान के जनपदों को रियायत देने की बात करती है , जबकि उत्तराखण्ड़ के मैदानी जनपदों में जनसंख्या घनत्व तेजी से बढ़ रहा है.यदि भविष्य में जनसंख्या आधारित परिसिमन होगा तो यह प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों के अपेक्षित विकास के लिए घातक होगा, राज्य गठन का मूल औचित्य ही समाप्त हो जायेगा.
वाहनी नेताओं ने कहा कि प्रेम चन्द्र अग्रवाल के त्यागपत्र के बाद कुछ लोग उत्तराखण्ड़ में जातीय वैमनस्य पैदा करने की कोशिश कर रहे है जो निन्दनीय है. उ.लो.वा. सरकार से माँग करती है कि “अभद्र टिप्पणी” करने वाले नेता प्रेम चन्द्र अग्रवाल के सभी कार्यों की जाँच की जाय. बैठक में कहा गया अप्रत्याशित रूप से बिजली के बिलों में वृद्धि पर वाहिनी सरकार से माँग करती है कि उत्तराखंड का सीना चीर कर बड़ी -बड़ी विद्युत उत्पादक कम्पनियों का राज्य होने के बावजूद राज्य को विद्युत वितरण में राहत नहीं दी जा रही है जो जल्द से जल्द विद्युत दरों में छूट दी जाए.बैठक में चिपकों आन्दोलन की नेत्री विमला बहुगुणा तथा पर्यावरणविद् एवं इतिहासकार शेखर पाठक की माता प्रेमा पाठक के निधन पर शोक व्यक्त कर उन्हें श्रद्धान्जली दी गई. बैठक में वरिष्ठ नेता एड. जगत रौतेला , अजयमित्र सिंह बिष्ट ,पूरन चन्द्र तिवारी , बिशन दत्त जोशी , जंग बहादुर थापा , दयाकृष्ण काण्डपाल, रेवती बिष्ट,अजय मेहता , हारिश,आराध्य आदि शामिल रहे.


