(ब्रह्माकुमारीज उप सेवा केंद्र अल्मोड़ा की माताओं-बहनों ने बंदी जनों एवं कारागार कर्मियों को बांधा प्रेम और विश्वास का रक्षा सूत्र अतीत जैसा भी रहा हो, उसे भूल स्वर्णिम भविष्य के निर्माण के वर्तमान में कर्म करें। ईश्वरीय विश्वविद्यालय का कैदियों को संदेश)


प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय उप सेवा केंद्र अल्मोड़ा की माताओं एवं बहनों ने कारागार पहुंचकर अधिकारियों, कार्मिकों तथा कारागार में निरुद्ध सभी बंदी जनों को प्रेम, आत्मीयता और विश्वास का रक्षा सूत्र भेंट किया।रक्षा सूत्र के इस पवित्र आयोजन ने कारागार प्रांगण में भाई-बहन के स्नेह, मानवीय संवेदना और आत्मिक संबंधों की एक सुंदर अनुभूति करा दी। ब्रह्माकुमारी बहनों ने बंदियों को राखी बांधते हुए उनके सुखद, शांतिपूर्ण और उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की।
इस अवसर पर बंदी जनों द्वारा रक्षाबंधन की भावना पर आधारित रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए। गीत, संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने वातावरण को भावपूर्ण बना दिया और उपस्थित सभी लोगों का मन भाव-विभोर हो उठा। कार्यक्रम के माध्यम से बंदी जनों ने अपनी प्रतिभा, संवेदनशीलता और सकारात्मक सोच का सुंदर परिचय दिया।
जिला कारागार अल्मोड़ा के अधीक्षक जयंत पांगती ने ब्रह्माकुमारीज उप सेवा केंद्र अल्मोड़ा की इस आत्मीय एवं मानवीय पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन बंदी जनों के भीतर सकारात्मक ऊर्जा, आत्मविश्वास और समाज की मुख्यधारा में लौटने की भावना को मजबूत करते हैं। उन्होंने सभी बंदी जनों एवं कारागार कर्मियों को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर सहित ब्रह्माकुमारीज उप सेवा केंद्र अल्मोड़ा की लगभग दो दर्जन माताओं एवं बहनों ने सभी बंदी जनों को अत्यंत आत्मीयता और भावनात्मक जुड़ाव के साथ रक्षा सूत्र भेंट किया ।
कार्यक्रम के दौरान ब्रह्माकुमारीज के हेमेंद्र जोशी ने कारागार अधीक्षक श्री जयंत पांगती के कार्यों की सराहना करते हुए उनकी विनम्रता, सहज व्यवहार तथा कारागार व्यवस्था के प्रति उनकी श्रेष्ठ लगन और कर्तव्यनिष्ठा की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि कारागार केवल दंड का स्थान नहीं, बल्कि व्यक्ति के जीवन में आत्मचिंतन, आत्मपरिवर्तन और नई शुरुआत का अवसर भी बन सकता है।
उन्होंने बंदी जनों को प्रेरित करते हुए कहा कि अतीत में जो कुछ हुआ, उसे जीवन की अंतिम सच्चाई न मानें। अतीत से सीख लें, वर्तमान को संवारें और भविष्य को नई आशाओं के साथ गढ़ें। प्रेम, विश्वास और आत्मबल के साथ जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास ही व्यक्ति को वास्तविक अर्थों में आगे बढ़ाता है।
उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन केवल कलाई पर बांधा जाने वाला धागा नहीं, बल्कि यह प्रेम, विश्वास, मर्यादा, सुरक्षा और जिम्मेदारी का पवित्र संकल्प है। यदि इस रक्षा सूत्र के साथ हम अपने भीतर की नकारात्मकता, व्यसन, क्रोध, अहंकार और निराशा से भी रक्षा का संकल्प लें, तो जीवन में एक नई दिशा का उदय हो सकता है।डॉ. जे.सी. दुर्गापाल तथा डा०हेमंत पाण्डे ने भी सभी बंदी जनों तथा कारागार स्टाफ को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए उनके स्वस्थ, सुखद एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

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