( प्रदेशाध्यक्ष जगदीश चन्द्र पंत कुमुद मुख्य अतिथि, प्रदेश उपाध्यक्ष पुष्प लता जी, प्रदेश महामंत्री सौरभ पांडेय विशिष्ट अतिथि रहे, गोष्ठी का संचालन अल्मोड़ा जनपद इकाई अध्यक्ष हेमा आर्या शिल्पी ने किया)

वंदे मातरम् गीत की एक सौ पचासवीं वर्षगांठ पर अखिल भारतीय साहित्य परिषद जनपद इकाई अल्मोड़ा ने एक आन लाइन विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस गोष्ठी की अध्यक्षता व संचालन अल्मोड़ा जनपद इकाई की अध्यक्ष हेमा आर्या शिल्पी ने किया। गोष्ठी की शुरुआत अल्मोड़ा की जानी-मानी साहित्यकार व शिक्षिका ईकाई संयोजक मीना जोशी ” मीनू” ने सरस्वती वंदना के साथ की।

अपने मुख्य अतिथि सम्बोधन में प्रदेशाध्यक्ष जगदीश पंत कुमुद ने वंदेमातरम गीत पर प्रकाश डालते हुए कहा “वंदेमातरम” सम्बोधन ही एक नयी आंतरिक ऊर्जा का संचार करता है, इसे प्रदेश देशवासियों को अपने व्यवहार में लाना चाहिए। विशिष्ट अतिथि प्रदेश उपाध्यक्ष पुष्प लता जी ने वंदे मातरम् गीत के इतिहास पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा वंदेमातरम् गीत ने स्वतंत्रता आंदोलन में एक क्रांति ला दी। परिवर्तन और विकास में क्रान्तिकारी और क्रान्ति का विशेष महत्व है। वंदे मातरम् गीत हमारे देश का गौरव व सम्मान है। इसे दैनिक जीवन में लाना होगा। संस्था के प्रदेश महासचिव सौरभ पांडेय ने भी वंदे मातरम् गीत पर अपने विचार व्यक्त कर कहा वंदेमातरम और भारत मां का भगवा ध्वज त्याग तपस्या और बलिदान का प्रतीक तो है ही साथ ही मातृभूमि के प्रति सच्चे स्नेह का भी प्रतीक है।तीन घंटे तक चली आन लाइन गोष्ठी में वक्ताओं ने वंदे मातरम् गीत, स्वतंत्रता आंदोलन, देश की वर्तमान दशा और दिशा पर खुल कर संवाद किया।
इसके अतरिक्त गोष्ठी में अखिल भारतीय साहित्य परिषद के उद्देश्य आदि पर भी प्रदेशाध्यक्ष व प्रदेश महामंत्री ने उपस्थित लोगों को बताया।
बैठक में तय किया गया कि अल्मोड़ा जनपद इकाई भी अखिल भारतीय साहित्य परिषद के उद्देश्य को पूरा करने के लिए समय समय पर कार्यक्रम आयोजित करेगा साथ ही साहित्यकारों व नवोदित साहित्यकार को एक राष्ट्रीय स्तर का मंच उपलब्ध कराने में तथा सम्मानित करने में अपनी भूमिका अदा करेगा।इस गोष्ठी में अल्मोड़ा जनपद इकाई के पदाधिकारियों व सदस्यों यथा हेमा आर्या शिल्पी, मीनू जोशी, उमा तिवारी, वीना चतुर्वेदी, एडवोकेट संजय कुमार अग्रवाल ने भी अपने विचार व्यक्त किए। जनपद इकाई के उपाध्यक्ष डाक्टर रमेश सिंह पाल ने भी नैपाल यात्रा दौरान विचार व्यक्त किए तथा शुभकामनाएं दी।
अंत में तय किया गया अखिल भारतीय साहित्य परिषद जनपद इकाई प्रदेश इकाई के मार्गदर्शन व नेतृत्व में शीध्र ही अल्मोड़ा में एक साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित करेगा, जिसकी तैयारी हेतु चर्चा की गयी।
अंत में उत्तराखंड के जाने-माने साहित्यकार व रंगकर्मी दीवान कनवाल दीवान दा के आक्समिक निधन पर दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की। वक्ताओं ने कहा दीवान कनवाल का हमारे बीच से चला जाना साहित्य व सांस्कृतिक क्षेत्र में अपूरणीय क्षति है। दीवान दा हमारे बीच सशरीर नहीं है लेकिन वे शब्दों के रूप में अमर रहेंगे

















