देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश के हजारों उपनल कर्मचारियों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कार्मिक विभाग द्वारा जारी नए दिशानिर्देशों के अनुसार, अब राज्य का कोई भी विभाग उन पदों पर सीधी भर्ती नहीं कर सकेगा जहाँ वर्तमान में उपनल कर्मचारी तैनात हैं।
अपर सचिव (कार्मिक) गिरधारी सिंह रावत ने स्पष्ट किया है कि जिन पदों पर उपनल के माध्यम से नियुक्तियाँ की गई हैं, उन पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने से पहले संबंधित विभाग को न्याय, वित्त और कार्मिक विभाग से अनिवार्य रूप से अनुमति लेनी होगी। इस आदेश का उद्देश्य उपनल कर्मियों की सेवाओं को सुरक्षा प्रदान करना और बिना पूर्व नियोजन के उनकी जगह नई नियुक्तियों को रोकना है।
यह निर्णय नैनीताल हाईकोर्ट द्वारा कुंदन सिंह बनाम उत्तराखंड राज्य मामले में दिए गए ऐतिहासिक फैसले के अनुपालन में लिया गया है। सरकार ने सभी विभागों को इन आदेशों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं, जिससे उपनल कर्मचारियों में सुरक्षा की भावना जगी है। अब किसी भी पद के लिए अधियाचन भेजने से पहले त्रिस्तरीय विभागीय अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

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