( जाने-माने साहित्यकारों और कवियों ने काव्य गोष्ठी आयोजित करने व सफलतापूर्वक आयोजन में विशेष योगदान दिया)

उत्तराखण्ड पर्वतीय रचनाकार मंच (साहित्य एवं लोक संस्कृति संगम) द्वारा काव्य गोष्ठी “शब्द सरोवर” का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का कुशल एवं प्रभावशाली संचालन अपराजिता उन्मुक्त ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मंच के संरक्षक गिरीश त्रिपाठी ‘ओम’ ने की।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि शंकर सिंह बिष्ट रहे। जो पर्यावरण संरक्षण हेतु सदैव तत्पर रहते हैं। आपने अपने संबोधन में सभी उपस्थित कलमकारों को पर्यावण संरक्षण हेतु प्रेरित किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ गणेश स्तुति से हुआ। इसके पश्चात एक के बाद एक रचनाकारों ने अपनी-अपनी रचनाओं से श्रोताओं को साहित्यिक आनंद से सराबोर किया।
रचनाकारों की रचनाएं (प्रस्तुति क्रम में)
गिरीश चंद्र त्रिपाठी ‘ओम’ (संरक्षक)
“घर में पधारो गजानंद जी, मेरे घर में पधारो”
श्रीमती जानकी त्रिपाठी(उपाध्यक्ष)
“मां शारदे वीर मधुर बजा देना”
सुश्री दिव्या पांडे
“घर-घर ढूंढा, आंगन-आंगन ढूंढती ढूंढती,
चॉकलेट दिलाने काका आया था”
श्रीमती आशा बुटोला
“मखमली कोहरे से छनकर
जब आती है जाड़े की धूप”
श्रीमती रेनू बिष्ट (गढ़वाली गीत)
“जय है जो मेरी नंद मां सुनंदा माई की,
कैलाश हुणी ड्वाल उठीगो नंदा माई को”
श्रीमती ममता गोसाई
“मौसम-मौसम ने फिर बदली करवट,
बादल जा पहुंचे मनाने सूरज को झट-पट”
श्रीमती मुन्नी पांडे
“शब्दों के सरोवर शब्द की नौका,
सृजनकर्ता खेवैया है, श्रोता कर रहे बिहार”
श्रीमती उमा तिवारी
“बीते दिन आज भी,
यादों की खिड़की से झांक जाते हैं”
श्रीमती मीना आर्या
“ये तपती धूप, ये काले घने बादल,
ये भटकती इच्छाएं, ये हाथ से छूटते साहिल”
श्रीमती विनीता सामंत
“मां तुम हो तो सब कुछ है,
पिता आसमान है, सबसे महान है”
हेमचंद सकलानी
जहां से शिखरों तारों को छूने का मन करता है
जहाँ अंबर को बांहों में भरने का दिल करता है
सुमित कुमार
“चाय की गरम प्याली —
एक नए दिन की शुरुआत है”
श्रीमती हेमा जोशी ‘स्वाति’
“गुजर गया 2025”
हेमचंद्र हेमंत (संयोजक)
“धरा बचाने आगे आए,
पेड़ों को अब विनाश से बचाएं”
सुश्री अपराजिता उन्मुक्त (अध्यक्ष)
“भारत भू का मन भारत दर्शन”
श्रीमती हेमा आर्या ‘शिल्पी’ (संस्थापिका)
“नव वर्ष का कुछ यूं आरंभ करें”
श्रीमती कला गोस्वामी
“कवि करता है कल्पना,
कवि करता है अल्पना”
कार्यक्रम के समापन सत्र में अध्यक्ष गिरीश त्रिपाठी ‘ओम’ ने सभी रचनाकारों की रचनाओं की सारगर्भित समीक्षा की तथा लेखन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने अपराजिता उन्मुक्त द्वारा किए गए सशक्त संचालन की भूरि-भूरि प्रशंसा की। इसके पश्चात उनके द्वारा प्रस्तुत कुमाऊनी गीत
“भारत की छै तीन कामना,
जल-थल-वायु छना नामा”
ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम के अंत में मंच की संस्थापिका श्रीमती हेमा आर्या “शिल्पी” ने सभी कार्यकारिणी सदस्यों, मंचासीन कवि-कवयित्रियों एवं सहयोगियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया तथा सभी साहित्यकारों के उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ कार्यक्रम के शुभ समापन की घोषणा की।
रिपोर्ट : श्री गिरीश त्रिपाठी ‘ओम’

















