गरमपानी (नैनीताल): मानसून की दस्तक के साथ ही खैरना-गरमपानी बाजार के निवासियों के मन में शिप्रा और कोसी नदी के रौद्र रूप का खौफ एक बार फिर गहराने लगा है। क्षेत्र की 2,000 से अधिक आबादी के लिए मानसून का आगमन राहत के बजाय भय और अनिश्चितता लेकर आता है।

2021 की तबाही का मंजर आज भी ताजा

वर्ष 2021 में हुई मूसलाधार बारिश के दौरान शिप्रा नदी ने भीषण तबाही मचाई थी। उस आपदा में नदी के तेज बहाव में बाजार के 5 मकान पूरी तरह बह गए थे, जबकि 100 से अधिक घरों व दुकानों में पानी भर गया था। स्थिति इतनी विकराल हो गई थी कि प्रशासन को पूरे बाजार के लोगों को रातों-रात सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करना पड़ा था। आज भी बारिश तेज होते ही स्थानीय लोगों की आंखों के सामने वही भयावह मंजर तैरने लगता है।

बाईपास निर्माण के मलबे से बढ़ा खतरा

स्थानीय निवासियों का कहना है बाईपास निर्माण के दौरान निकला मलबा भी नदी में डाला गया है। इससे नदी का प्रवाह प्रभावित होने के साथ ही बारिश के दौरान खतरा और बढ़ने की आशंका बनी है। हालांकि, सिंचाई विभाग की ओर से खैरना-गरमपानी बाजार में नदी से सुरक्षा के लिए सुरक्षा दीवार का निर्माण किया गया है, लेकिन लोगों ने नदी में जमा मलबे को हटाने, नदी के बहाव क्षेत्र का निरीक्षण करने और मानसून से पहले प्रभावी सुरक्षा इंतजाम करने की मांग की है।

हालांकि सिंचाई विभाग ने बाजार को बचाने के लिए सुरक्षा दीवारों का निर्माण कराया है, लेकिन स्थानीय लोग इससे पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। ग्रामीणों ने मानसून के दौरान किसी भी अनहोनी से बचने के लिए नदी में जमा मलबा तत्काल हटाने, नदी के बहाव क्षेत्र का तकनीकी निरीक्षण करने और पुख्ता सुरक्षा इंतजाम करने की मांग की है।

“शिप्रा नदी में 2021 में बारिश के कारण भारी आपदा आई थी। जिसके बाद सिंचाई विभाग द्वारा सुरक्षा की दृष्टि से गरमपानी और खैरना बाजार में सुरक्षा दीवारों का निर्माण कराया गया।” — नीरज तिवारी, जेई, सिंचाई विभाग

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