गरमपानी। देश और प्रदेश में भले ही स्वच्छता अभियान के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हों, लेकिन गरमपानी बाजार में हकीकत इसके ठीक उलट है। पिछले कुछ सालों से बंद पड़े सार्वजनिक शौचालय को स्थानीय जनता के भारी दबाव और दिक्कतों के बाद आखिरकार जैसे-तैसे दोबारा बनाया तो गया, लेकिन कहानी में ट्विस्ट अभी बाकी था। शौचालय का पूरा काम कंप्लीट हुए आज एक महीना बीत चुका है, मगर विडंबना देखिए कि इसके मुख्य दरवाजे पर आज भी एक बड़ा सा ताला लटका हुआ है।

​इस अव्यवस्था को देखकर स्थानीय व्यापार मंडल और राहगीर अब यह सवाल उठाने लगे हैं कि क्या इस शौचालय का निर्माण सिर्फ सरकारी कागजों में प्रगति दिखाने और बजट ठिकाने लगाने के लिए किया गया था? अगर इसे आम जनता के लिए खोलना ही नहीं था, तो सरकारी धन और जनशक्ति को इसमें क्यों बर्बाद किया गया?

​शौचालय तैयार होने के बाद भी बंद रहने से सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं, बुजुर्गों और हाईवे से गुजरने वाले यात्रियों को हो रही है। अल्मोड़ा-हल्द्वानी राष्ट्रीय राजमार्ग पर होने के कारण यहां रोजाना सैकड़ों गाड़ियों की आवाजाही होती है। शौचालय बंद होने की वजह से महिलाओं को अपनी मर्यादा ताक पर रखकर या तो खुले में जाना पड़ रहा है, या फिर मजबूरी में बार-बार आस-पास के निजी रेस्टोरेंट और होटलों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुरुषों के लिए तो जैसे-तैसे काम चल जाता है, लेकिन महिलाओं के लिए यह स्थिति बेहद शर्मनाक और मानसिक प्रताड़ना जैसी है।

​लोगों में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है। स्थानीय जनता ने चेतावनी दी है कि यदि अगले कुछ दिनों के भीतर इस नवनिर्मित शौचालय का ताला खोलकर इसे सुचारू रूप से जनता को समर्पित नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

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