नैनीताल। ईंधन संरक्षण और राष्ट्र सशक्तिकरण की दिशा में एक अनूठी मिसाल पेश करते हुए उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता के नेतृत्व में शुक्रवार को ‘नो व्हीकल डे’ (नो फ्यूल डे) मनाया गया। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश सहित उच्च न्यायालय के तमाम न्यायाधीशों, अधिकारियों और अधिवक्ताओं ने अपने वाहनों को छोड़कर आवास से न्यायालय परिसर तक पैदल मार्च किया।
स्वास्थ्य और राष्ट्र निर्माण का संदेश
इस पहल की सराहना करते हुए मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता ने कहा कि यह कदम राष्ट्र की परिस्थितियों में योगदान देकर देश को सशक्त बनाने का एक प्रयास है। उन्होंने इसे एक शुरुआत बताते हुए भविष्य में भी इस सिलसिले को जारी रखने की बात कही। वहीं, न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल ने फिटनेस और पर्यावरण दोनों के लिए हर व्यक्ति को रोजाना पैदल चलने की सलाह दी। इस विशेष अभियान के तहत अधिवक्ताओं को वर्चुअल मोड के माध्यम से भी न्यायालय से जुड़ने की सुविधा दी गई।
न्यायिक परिवार की रही पूरी सहभागिता
इस पैदल यात्रा में वरिष्ठ न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी, न्यायमूर्ति रविन्द्र मैठाणी, न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल, न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित, न्यायमूर्ति आलोक मेहरा, न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह शामिल रहे। प्रशासनिक मोर्चे पर रजिस्ट्रार जनरल योगेश गुप्ता, मैम्बर सचिव प्रदीपमणि त्रिपाठी, रजिस्ट्रार सुबीर कुमार, प्रतिभा तिवारी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों और भारी संख्या में अधिवक्ताओं ने पैदल चलकर अपनी भागीदारी दर्ज कराई।
शासन के ‘मितव्ययता अभियान’ से प्रेरित पहल
यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचाने की सलाह और उत्तराखंड शासन के मुख्य सचिव व प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु द्वारा जारी उस दिशा-निर्देश के बाद आया है, जिसमें सरकारी विभागों को ईंधन खपत कम करने, कार पूलिंग, साइकिलिंग, वर्क फ्रॉम होम और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। हाल ही में नैनीताल के जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल और सीडीओ अरविंद कुमार पांडे ने भी इस ‘नो व्हीकल डे’ का पालन कर संदेश दिया था।

















