उत्तराखंड के प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. शिवप्रसाद डबराल ‘चारण’ की पुस्तक ‘उत्तराखंड के अभिलेख एवं मुद्रा’ उत्तराखंड के इतिहास पर उपलब्ध दुर्लभ पुस्तकों में से एक है। उत्तराखंड के अतीत को अभिलेखीय साक्ष्यों के आधार पर पुस्तकाकार रूप में प्रस्तुत करने का यह उनका प्रथम और अनूठा प्रयास है।

इस ग्रंथ का सबसे बड़ा महत्व इस बात में निहित है कि इसने उत्तराखंड के इतिहास के प्राथमिक स्रोतों- अभिलेखों और मुद्राओं को पहली बार व्यवस्थित रूप में एक स्थान पर उपलब्ध कराया। इससे इतिहासकारों, पुरातत्त्वविदों, भाषाविदों तथा शोधार्थियों को मूल स्रोतों तक पहुंचने का सुलभ माध्यम प्राप्त हुआ। अभिलेख और मुद्राएं इतिहास के सबसे विश्वसनीय साक्ष्यों में गिने जाते हैं, क्योंकि वे अपने समय के प्रत्यक्ष दस्तावेज होते हैं।

डॉ. शिवप्रसाद डबराल ने इन बिखरे हुए स्रोतों को एकत्र कर न केवल इतिहासकारों के लिए, बल्कि उत्तराखंड की ऐतिहासिक चेतना के लिए भी एक स्थायी आधार निर्मित किया है। इस दृष्टि से यह पुस्तक केवल एक संकलन नहीं, बल्कि उत्तराखंड के इतिहास-लेखन की आधारशिला रखने वाली महत्त्वपूर्ण कृतियों में गिनी जाती है।
~ ललित तुलेरा
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