अल्मोड़ा। सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा और इसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में बंदरों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि लोगों का घरों से निकलना दूभर हो गया है। हिंसक होते बंदरों के हमले की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिससे स्थानीय जनता में भारी रोष और भय का माहौल है।
जिला अस्पताल से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष जनवरी से लेकर अप्रैल माह तक बंदरों के हमले से घायल होकर 167 लोग उपचार के लिए अस्पताल पहुंचे हैं। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इन घायलों में 50 से अधिक मासूम बच्चे शामिल हैं। बंदरों के झुंड अब न सिर्फ राहगीरों पर हमला कर रहे हैं, बल्कि घरों और आंगन में खेल रहे बच्चों को भी निशाना बना रहे हैं।
बंदरों की बढ़ती संख्या और उनके हिंसक व्यवहार पर लगाम लगाना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। स्थिति यह है कि नगर पालिका और वन विभाग पूरी तरह बेबस नजर आ रहे हैं। विभाग द्वारा बंदरों को पकड़ने की कोई ठोस योजना धरातल पर नहीं दिख रही है, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
शहर में जहां लोग सुरक्षित नहीं हैं, वहीं गांवों में बंदरों ने खेती को चौपट कर दिया है। हिंसक बंदरों के कारण अब लोग अपने ही खेतों में जाने से कतराने लगे हैं। यदि समय रहते वन विभाग ने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया, तो आने वाले दिनों में यह समस्या और भी विकराल रूप ले सकती है। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से बंदरों को पकड़ने और उन्हें आबादी क्षेत्र से दूर छोड़ने की पुरजोर मांग की है।

















