उत्तराखंड सरकार 1 जनवरी 2026 (नए साल) से राज्य की सीमाओं में प्रवेश करने वाले बाहरी राज्यों के वाहनों पर ‘ग्रीन सेस’ (Green Cess) लागू करने जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में राजस्व समीक्षा बैठक में इसके निर्देश दिए हैं। यह शुल्क सीधे आपके वाहन के FASTag से कटेगा। किस वाहन पर कितना लगेगा शुल्क? वाहन के प्रकार और वजन के अनुसार शुल्क की दरें अलग-अलग तय की गई हैं:
वाहन का प्रकार
ग्रीन सेस (प्रति दिन)
निजी कार / मोटर कैब / मैक्सी कैब
₹80
12 सीट से अधिक वाली बसें
₹140
डिलीवरी वैन (3 टन तक)
₹80
हल्के माल वाहन (3 से 7.5 टन)
₹120
मध्यम माल वाहन (7.5 से 18.5 टन)
₹250
भारी वाहन (एक्सल के आधार पर)
₹450 से ₹700
भारी निर्माण उपकरण (जेसीबी आदि)
₹250
मुख्य बातें जो आपको जाननी चाहिए:
वैधता: एक बार कटा हुआ शुल्क पूरे दिन (24 घंटे) के लिए मान्य होगा। आप उस दिन कितनी भी बार एंट्री/एग्जिट करें, दोबारा पैसे नहीं कटेंगे।
पास सिस्टम: अगर आप बार-बार उत्तराखंड आते हैं, तो आप 3 महीने (20 गुना शुल्क देकर) या 1 साल (60 गुना शुल्क देकर) का पास भी बनवा सकते हैं।
कैसे होगी वसूली? राज्य की सीमाओं पर ANPR (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) कैमरे लगाए गए हैं। जैसे ही गाड़ी कैमरा क्रॉस करेगी, FASTag से पैसे कट जाएंगे। किन्हें मिलेगी छूट? इन वाहनों को कोई ग्रीन सेस नहीं देना होगा:
उत्तराखंड में रजिस्टर्ड सभी वाहन।
अन्य राज्यों के दोपहिया वाहन (Bikes/Scooters)।
इलेक्ट्रिक (EV), सीएनजी (CNG), सोलर और हाइब्रिड वाहन।
एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड, सेना के वाहन और सरकारी गाड़ियां।
खेती के उपकरण जैसे ट्रैक्टर-ट्रॉली और हार्वेस्टर। उद्देश्य: सरकार का लक्ष्य इस सेस से मिलने वाले राजस्व (लगभग 50-100 करोड़ सालाना) का उपयोग पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण और सड़क सुरक्षा के लिए करना है।