( प्रदेश कार्यकारिणी शीध्र करेगी औपचारिक घोषणा)
अखिल भारतीय साहित्य परिषद की अल्मोड़ा जनपद इकाई की अध्यक्ष हेमा आर्या शिल्पी ने अलमोडा़ के जाने-माने वैज्ञानिक व आध्यात्मिक साहित्यकार डाक्टर रमेश सिंह पाल को जनपद इकाई का उपाध्यक्ष बनाये जाने की अनुशंसा प्रदेश कार्यकारिणी व राष्ट्रीय कार्यकारिणी को भेजी है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी से अनुमोदन प्राप्त होने पर प्रदेश कार्यकारिणी शीध्र औपचारिक घोषणा कर देगी।
डॉक्टर रमेश सिंह पाल वर्तमान में ICAR-VPKAS, अल्मोड़ा में एक वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक के रूप में कार्यरत हैं। एक शोधकर्ता के रूप में, डाक्टर पाल ने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में 50 से अधिक शोध लेख और राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कार्यशालाओं/सम्मेलनों में 18 से अधिक शोध प्रस्तुतियाँ प्रकाशित की हैं। उन्होंने मक्का, मटर, मटर, सोयाबीन और मसूर जैसी फसलों के लिए दर्जनों से अधिक उच्च उपज देने वाली और पोषक तत्वों से भरपूर किस्मों के विकासकर्ता या सह-विकासकर्ता के रूप में भागीदार दी है। अपनी सीधी बातचीत और व्याख्यानों के माध्यम से एक आध्यात्मिक कार्यकर्ता के रूप में युवाओं और समाज से जुड़े हुए हैं।
साहित्य सृजन क्षेत्र में अपनी आध्यात्मिक यात्रा से प्राप्त ज्ञान का सार उनकी पहली हिंदी पुस्तक “अपना स्वरूप (हिंदी)” में वर्ष 2018 में प्रकाशित हुआ जिसे पाठकों द्वारा खूब सराहा गया। इस पुस्तक को कुकू एफएम पर 5 लाख से अधिक बार सुना गया है। उनकी दूसरी पुस्तक, सभी प्रमुख धर्मग्रंथों का सारांश, ” Spiritual Wisdom: Guaranteed Prescription of Success and Happiness (अंग्रेजी)”, 2020 में जारी की गई थी और उनकी तीसरी पुस्तक “रूपांतरण के सूत्र (हिंदी)” 2023 में जारी की गई थी, और हाल ही में उनकी चौथी पुस्तक “मृत्यु से मुक्ति तक (हिंदी)” 2024 में प्रकाशित हुई थी। उनकी पाँचवीं पुस्तक ” I Know the Humun Mind (अंग्रेजी)” मई, 2025 में प्रकाशित हुई थी। यह पुस्तक मानसिक कंडीशनिंग की परतों को हटाकर चेतना की शांत बुद्धि को प्रकट करती है। नवीनतम पुस्तक “मानस-विद” दिसंबर 2025 में प्रकाशित हुई और इसका उद्घाटन उत्तराखंड के माननीय मुख्यमंत्री द्वारा किया गया। डॉ. पाल की पुस्तकों को देश की संसद पुस्तकालय के साथ-साथ अन्य केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों और पुस्तकालयों में भी शामिल किया गया है। वह अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य और कल्याण के लिए भारत से यूनेस्को समावेशी नीति प्रयोगशाला के विशेषज्ञ सदस्य हैं। उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया है, जैसे कि नई दिल्ली की “ग्लोबल इकोनॉमिक प्रोग्रेस एंड रिसर्च एसोसिएशन” सोसायटी द्वारा भारत रत्न मदर टेरेसा गोल्ड मेडल अवार्ड, भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त इंडिया रिकॉर्ड्स प्रेजेंट एक्सीलेंस अवार्ड 2021 सामाजिक कार्य और सेवाओं की श्रेणी में, और 2025 में इंडियन लिटरेचर एंड आर्ट्स सोसायटी द्वारा इंडियन लिटरेचर अवार्ड। स्कॉलर्स एकेडमिक एंड साइंटिफिक (SAS) सोसायटी ने उन्हें SAS फेलो और अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय सम्मेलनों में वैज्ञानिक पुरस्कारों से भी सम्मानित किया है। रमेश सिंह पाल स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों में कई साधकों और छात्रों के साथ मुफ्त चर्चा सत्र, आत्म-जागरूकता वार्ता और आमने-सामने की बैठकों के माध्यम से खुद को साझा करने में लगे रहते हैं। उनकी किताबों की 200 से ज़्यादा प्रतियां विभिन्न स्कूल और कॉलेज पुस्तकालयों में मुफ्त में बांटी गई हैं।
हजारों आध्यात्मिक साधक विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म पर उनसे जुड़े हुए हैं और वह लगातार आध्यात्मिकता के प्रति आम लोगों की सोच को बदलने का प्रयास कर रहे हैं। अखिल भारतीय साहित्य परिषद को भी डाक्टर रमेश सिंह पाल की योग्यता और अनुभव का लाभ संस्था की गतिविधियों को बढ़ावा देने में मिलेगा। रमेश सिंह पाल की उपाध्यक्ष पद पर नियुक्ति होने पर जनपद संयोजिका प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य साहित्यकार व शिक्षिका मीनू जोशी, जनपद अध्यक्ष हेमा आर्या शिल्पी, सोनू उप्रेती सांची, वीणा चतुर्वेदी, विपिन जोशी कोमल, उमा तिवारी, संजय कुमार अग्रवाल सहित अनेक सदस्यों ने हर्ष व्यक्त करते हुए डाक्टर रमेश सिंह पाल को बधाई दी है।
जिला अध्यक्ष हेमा आर्या शिल्पी ने डाक्टर पाल की नियुक्ति पर कहा है कि परिषद में डाक्टर पाल के अनुभवों का साहित्य सृजन और साहित्यिक गतिविधियों में भरपूर लाभ मिलेगा ्

















