( कविता सृजन हृदय की आवाज है, बाकी तो तुकबंदी है। सुनील पाठक प्रदेशाध्यक्ष)

अखिल भारतीय साहित्य परिषद की नवगठित जनपद इकाई अल्मोड़ा ने नव वर्ष की मंगलमय बेला में आन लाइन प्रथम काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस काव्य गोष्ठी के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार संगठन के प्रदेशाध्यक्ष सुनील पाठक जी रहे, कार्यक्रम की अध्यक्षता अध्यक्ष हेमा आर्या “शिल्पी” ने की, काव्य गोष्ठी का संचालन बीना चतुर्वेदी “वीणा ” ने किया।इस आयोजन की विशेषता रही सभी प्रतिभागियों ने हृदयस्पर्शी और समकालीन काव्य पाठ किया।

काव्य गोष्ठी की शुरुआत बीना जोशी की सरस्वती वंदना से हुयी। प्रकृति चित्रण, अल्मोड़ा चित्रण, नारी सम्मान, वियोग आदि से ओतप्रोत कविता प्रस्तुत हुयीं। मुख्य अतिथि सुनील पाठक ने कहा कि कविता सृजन हृदय की आवाज है, हृदय की आवाज की कविता कालजयी रहती है, जयशंकर प्रसाद, निराला, सुमित्रानंदन पंत, शैलेष मटियानी, उदय शंकर, आदि आदि इसका उदाहरण है। वरिष्ठ वैज्ञानिक व आध्यात्मिक साहित्यकार डाक्टर रमेश सिंह पाल ने श्रीमद् भगवत गीता के प्रथम और अंतिम श्लोक के साथ काव्य पाठ कर गोष्ठी को समापन की तरफ अग्रसर किया।
-:काव्य गोष्ठी की कुछ झलक:-
अल्मोड़ा यों रचा बसा है,
हर एक दिल की धड़कन में।
क़तरा क़तरा स्नेह भरा है,
माटी के हर कण – कण में।
– मीनू जोशी
अभी बहुत हैं तेरे दिल से मेरे दिल की दूरियां
मुझे न समझ पाने की तेरी कैसी हैं ये मजबूरियां।
चंद्रा उप्रेती
चुभ जाती है बातें कभी,
तो कभी लहजे मार जाते हैं।
जिंदगी में अक्सर लोग,
गैरों से ज्यादा अपनों से हार जाते हैं।
डाक्टर रमेश सिंह पाल
नये साल तुझसे दुआ मांगती हूं,
अमन मांगती हूं चमन मांगती हूं।
विनीता जोशी
मेरी छोटी सी भूल की,
बहुत बड़ी सजा दे गये।
पलक झपकते ही,
प्रियतम से पितृ बन गये।।
संजय कुमार अग्रवाल
ये मौसमों का शहर है
मेरे दिल के बीच बसा हुआ
कभी बर्फ की बिछी चांदनी
कभी गुल पे छाई बहार है
वीणा चतुर्वेदी”वीणा”
हम ऐसे समय में चुप क्यों हैं
जबकि हमें उतर आना चाहिए
सड़कों पर
प्रेमा गड़कोटी
आज की ये भोर देखो, धुंध में सिमटी हुई,
ओस की चादर बिछाए, शीत में लिपटी हुई।
हेमा आर्या ” शिल्पी”
कलख करती चिड़ियों के,
सपनों को मैंने देखा था।
उड़ान भरती चिड़ियों के
अरमानों को मैंने देखा था।।
विपिन जोशी “कोमल”
काव्य गोष्ठी का समापन करते हुए अध्यक्ष हेमा आर्या “शिल्पी” ने कहा हमें विशेष प्रसन्नता है कि इस आयोजन में प्रदेश एवं जनपद के प्रतिष्ठित रचनाकार अपनी रचनाओं के माध्यम से हमें भाव, विचार और संवेदना की यात्रा पर ले जाने वाले हैं। सभी रचनाकारों ने धरातल से जुड़ी रचनाएं पढ़ी। तत्पश्चात सभी रचनाकारों द्वारा पढ़ी गई रचनाओं की सूक्ष्म समीक्षा करते हुए आगे की योजना पर विचार विमर्श किया। प्रदेशाध्यक्ष सुनील पाठक का आभार व्यक्त करते हुए उचित मार्गदर्शन हेतु निवेदन किया, साथ ही परिषद के साथ जुड़े साहित्यकारों से परिषद को सहयोग की अपील के साथ कार्यक्रम के समापन की घोषणा की।
















