भाकृअनुप-विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा द्वारा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत जनपद अल्मोड़ा के विभिन्न गांवों (ऐना, कुवाली, महतगांव, पागसा एवं गोग्यान बासी सीम) में एकदिवसीय सघन कृषक जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया, जिसमें कुल 127 कृषकों ने सहभागिता की। संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कांत ने इस अभियान पर विशेष मार्गदर्शन में वैज्ञानिकों ने प्रक्षेत्र स्तर पर जाकर किसानों को अंधाधुंध रासायनिक उर्वरकों के बजाय मृदा परीक्षण-आधारित संतुलित पोषण प्रबंधन अपनाने और “खेत का पानी खेत में, खेत की मिट्टी खेत में” के सिद्धांत को धरातल पर उतारने का प्रयास किया।

कार्यक्रमों के दौरान वैज्ञानिकों के दलों ने किसान गोष्ठियों और प्रक्षेत्र स्तर पर सीधे संवाद के माध्यम से ग्राम ऐना में संतुलित उर्वरक उपयोग व अच्छी तरह से सड़ी हुई गोबर की खाद की वैज्ञानिक तैयारी पर बल दिया, वहीं कुवाली एवं महतगांव में रासायनिक उर्वरकों के विवेकपूर्ण प्रयोग, हरी खाद व जैविक इनपुट्स की जानकारी देने के साथ ही कच्ची गोबर से बढ़ने वाले कुरमुला कीट के वैज्ञानिक प्रबंधन पर चर्चा की।

इसके अतिरिक्त, ग्राम पागसा व महतगांव में प्राकृतिक खेती और जैव उर्वरकों के लाभ समझाए गए, तथा स्याल्दे के गोग्यान बासी सीम में स्थानीय कृषि अधिकारियों की उपस्थिति में किसानों को संतुलित कृषि के साथ-साथ प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और किसान आईडी निर्माण की प्रक्रिया से अवगत कराया गया। जंगली जानवरों (सूअर व बंदरों) से फसल नुकसान और सिंचाई संकट जैसी किसानों की प्रमुख समस्याओं पर विशेषज्ञों ने तार-बाड़ योजना, जियोलाइन टैंक निर्माण तथा स्प्रिंकलर व ड्रिप सिंचाई प्रणालियों जैसे वैज्ञानिक समाधान अपनाने पर बल दिया। इस अभियान का सफल संचालन संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र मीणा, डॉ. नवीन गहत्याड़ी, डॉ. कामिनी बिष्ट, डॉ. प्रकाश घासल एवं डॉ. अनुराधा भारतीय द्वारा किया गया, जिसे किसानों ने अत्यंत उपयोगी बताते हुए प्रक्षेत्र प्रबंधन व सरकारी योजनाओं पर सक्रियता से प्रश्न पूछे।

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