उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी (उपपा) द्वारा आयोजित दो दिवसीय संवाद शिविर में उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों से आए आंदोलनकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रबुद्ध नागरिकों ने राज्य की बदहाली के लिए जिम्मेदार ताकतों को सत्ता से बेदखल करने और क्षेत्रीय संघर्षशील शक्तियों को एकजुट कर एक सशक्त राजनीतिक विकल्प तैयार करने का संकल्प लिया। शिविर के प्रारंभ में विकास के नाम पर हुई तबाही में जान गंवाने वालों को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उपपा के केंद्रीय अध्यक्ष पी सी तिवारी ने कहा कि उत्तराखंड की जनता ने लंबे संघर्षों और बलिदानों के बाद जो राज्य प्राप्त किया, वह आज लूट- खसोट और अराजकता का केंद्र बन गया है।

उन्होंने कांग्रेस और भाजपा जैसी राष्ट्रीय पार्टियों की नीतियों को प्राकृतिक संसाधनों की लूट, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाओं के बाजारीकरण और खेतीबाड़ी की बर्बादी का जिम्मेदार ठहराया। तिवारी ने जोर देकर कहा कि जनता की हताशा और आक्रोश को सही दिशा देना आज की जरूरत है, ताकि उत्तराखंड के सपनों को साकार किया जा सके। प्रबुद्ध पत्रकार व आंदोलनकारी चारु तिवारी ने कहा कि कांग्रेस और भाजपा जैसे दल पूंजीपतियों और माफियाओं के हित में कार्य करते हैं, जिसके चलते राज्य के प्राकृतिक संसाधनों की निर्मम लूट हुई है।

उन्होंने इस लूट से मुक्ति के लिए राज्य की राजनीति के चरित्र को बदलने की आवश्यकता पर बल दिया। शिविर में सामाजिक कार्यकर्ता ईश्वरी दत्त जोशी, डॉ. पुष्कर बिष्ट, शिक्षाविद् चंद्रशेखर बनकोटी, उपपा के प्रधान महासचिव प्रभात ध्यानी, केंद्रीय महासचिव नारायण राम, जनकवि गिरीश तिवारी (गिर्दा) की धर्मपत्नी हेमलता तिवारी, उनके सुपुत्र तुहिनांशु तिवारी, डिजाइनर व लेखक नवीन पांगती, पान सिंह नेगी, पूर्व कर्मचारी नेता चंद्रमणि भट्ट, चार्टर्ड अकाउंटेंट वरुण चंदोला समेत कई गणमान्य व्यक्तियों ने अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम का संचालन केंद्रीय महासचिव नरेश नौड़ियाल ने किया। इस सम्मेलन की कुछ झलकियां यूं रहीं

*मुख्य संकल्प:* 1. *पार्टी को मजबूत करना*: उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी को संगठनात्मक रूप से और अधिक व्यवस्थित और सशक्त बनाने का निर्णय।

2. *क्षेत्रीय ताकतों का एकीकरण*: राज्य की संघर्षशील ताकतों को एकजुट कर एक सशक्त राजनीतिक विकल्प तैयार करना।

3. *युवा, छात्र और महिला मुद्दों पर ध्यान*: इन वर्गों के मुद्दों को प्राथमिकता देते हुए नई पीढ़ी को उत्तराखंड के आंदोलनों की विरासत से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास।

4. *जन अभियान*: उपपा और सहयोगी संगठनों द्वारा परिवर्तनकारी शक्तियों को एकजुट करने के लिए व्यापक जन अभियान चलाने का फैसला।

5. *आगामी मुजफ्फरनगर कांड की बरसी*:

आगामी 2 अक्टूबर को मुजफ्फरनगर कांड की बरसी पर राज्य में विभिन्न स्तरों पर कार्यक्रम आयोजित करने की अपील की गयी

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