
( भाकृअनुप- विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा की अनूठी पहल)
भारतीय पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा के
निर्देशक डॉ. लक्ष्मीकांत, के मार्गदर्शन में, भाकृअनुप-विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा के वैज्ञानिकों के एक दल ने कृषि विज्ञान केंद्र, तवांग के अधिकारियों के साथ 20 अगस्त 2026 को तवांग जिले के ग्राम गोंगखार और ग्यामटोंग, ब्लॉक मुक्तो-बोंगखर का भ्रमण किया। इस भ्रमण का उद्देश्य मंडुवा की किस्म ‘वी.एल. मंडुवा 376’ के खेत में प्रदर्शन का आंकलन करना था। यह गतिविधि भाकृअनुप-विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के उत्तर-पूर्वी पर्वतीय क्षेत्रों हेतु कार्यक्रम के अन्तर्गत आयोजित की गईं।
भ्रमण के दौरान, वी. एल. मंडुवा 376 के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने और फसल की खेती पर किसानों के अनुभवों की सीधी प्रतिक्रिया लेने के लिए एक किसान-वैज्ञानिक संवाद और किसान दिवस का आयोजन किया गया। चर्चा का मुख्य बिन्दु किसानों द्वारा इस प्रजाति को अपनाने, खेती के दौरान आने वाली चुनौतियों और स्थानीय किस्मों की तुलना में ‘वी.एल. मंडुवा 376’ के प्रति किसानों की रूचि रहा।‘वी.एल. मंडुवा 376’ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह कम समय में पककर तैयार हो जाती है और स्थानीय किस्मों की तुलना में 25 से 35 दिन पहले कटाई के लिए तैयार हो जाती है। यह कम अवधि प्रजाति कृषकों को दूर-दराज के खेतों में जंगली जानवरों से फसलों की रखवाली करने में लगने वाले समय को काफी सीमा तक कम करती है। इससे इस क्षेत्र के उन कृषि समुदायों को बड़ी राहत मिलती है, जिन्हें खड़ी फसलों की सुरक्षा में काफी समय और मेहनत लगानी पड़ती है। जिन किसानों ने ‘वी.एल. मंडुवा 376’ की खेती की, उन्होंने स्थानीय किस्मों की तुलना में अच्छी उपज प्राप्त की।डॉ. कामिनी बिष्ट, डॉ. सी. के. सिंह, डॉ. आर. पी. मीना और डॉ. एम. एस. भिंडा के दल ने यह अनुभव किया कि कृषकों को बढ़ी हुई फसल का पूरा लाभ उठाने और बदले में ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने में मदद के लिए लक्षित पहलों की आवश्यकता है। ऐसी पहलें छोटे पैमाने पर मंडुवा आधारित उद्यमिता को बढ़ावा दे सकती हैं, जिससे स्थानीय समुदायों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर उत्पन्न होंगे। वैज्ञानिक दल के अनुसार कच्चे और प्रसंस्कृत दोनों तरह के मंडुवा उत्पादों के लिए सुस्थापित बाजारों का होना बहुत आवश्यक है, क्योंकि वर्तमान में किसानों को उनके लिए उपलब्ध बाजार चैनलों की सीमित जानकारी है।इस प्रकार संस्थान द्वारा तवांग में मंडुवा की उन्नत किस्म ‘वी.एल. मंडुवा 376’ का यह प्रदर्शन पर्वतीय कृषि विकास की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।

















