
व्यापार मंडल जिलाध्यक्ष बोले— “क्या व्यापारी सिर्फ टैक्स देने के लिए हैं? समाधान के लिए चंदा देने को भी तैयार”
अल्मोड़ा। अल्मोड़ा के मुख्य बाजार में आवारा सांड, गाय और बैलों के बढ़ते जमावड़े से व्यापारी, बुजुर्ग, महिलाएं और राहगीर खौफ के साए में आवाजाही करने को मजबूर हैं। कई लोग इन पशुओं के हमले में घायल हो चुके हैं, लेकिन नगर निगम प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस व स्थायी व्यवस्था नहीं की गई है।
नगर निगम की कार्यप्रणाली पर खड़े किए सवाल अल्मोड़ा व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष सुशील साह ने नगर निगम को घेरते हुए तीखा सवाल उठाया कि आखिर निगम की जिम्मेदारी क्या है? क्या व्यापारी सिर्फ तहबाजारी और हाउस टैक्स देने के लिए हैं? उन्होंने कहा कि निगम के कर्मचारी क्षेत्र में लगातार घूमते हैं, फिर भी उन्हें बाजार में खुलेआम घूमते आवारा पशु नजर नहीं आते। यदि भविष्य में किसी व्यापारी या नागरिक के साथ कोई गंभीर दुर्घटना होती है, तो इसकी नैतिक व प्रशासनिक जिम्मेदारी सीधे नगर निगम अल्मोड़ा की होगी।
“बजट नहीं है तो व्यापारी चंदा देने को तैयार” सुशील साह ने निगम को सहयोग का प्रस्ताव देते हुए कहा कि यदि बजट के अभाव में आवारा पशुओं को पकड़ने व उनके रखरखाव में समस्या आ रही है, तो व्यापार मंडल व्यापारियों से चंदा जुटाकर निगम को आर्थिक मदद देने को तैयार है। लेकिन अब कागजी कार्रवाई के बजाय जमीन पर ठोस काम दिखना चाहिए।
व्यापार मंडल की प्रमुख मांगें:
- बाजार क्षेत्र से आवारा पशुओं को तत्काल हटाया जाए।
- पशुओं के रखरखाव के लिए स्थायी आश्रय (कांजी हाउस/गौशाला) की व्यवस्था हो।
- बाजार में नियमित पशु नियंत्रण अभियान चलाया जाए।
- किसी भी अनहोनी से पहले प्रशासनिक जवाबदेही तय की जाए।

















