मांगों पर ठोस निर्णय न होने से कर्मचारियों में आक्रोश; विभागीय कामकाज ठप होने से आम जनता की बढ़ीं मुश्किलें।

देहरादून (विशेष संवाददाता): उत्तराखंड में कर्मचारी संयुक्त संगठन के प्रदेशव्यापी आह्वान पर 1 अक्टूबर 2026 से शुरू हुई कलमबंद हड़ताल का व्यापक असर अब पूरे राज्य में दिखाई दे रहा है। शासन व विभागीय स्तर पर वार्ता के बाद भी कर्मचारियों की लंबित मांगों पर कोई सकारात्मक समाधान न निकलने के कारण विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है।

प्रदेश के विभिन्न जिला व तहसील मुख्यालयों पर कर्मचारी संगठनों के बैनर तले कर्मचारियों ने धरना-प्रदर्शन कर जोरदार नारेबाजी की। हड़ताल के चलते कई विभागों और समितियों में प्रशासनिक व अन्य दैनिक कार्य पूरी तरह प्रभावित रहे, जिससे प्रमाण पत्र, एनओसी और अन्य जनहित कार्यों के लिए पहुंचे आम नागरिकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

संगठन के प्रतिनिधियों का स्पष्ट कहना है कि वे अपनी छह सूत्रीय व अन्य जायज मांगों को लेकर लंबे समय से ज्ञापन सौंप रहे थे, लेकिन सरकार की उदासीनता के कारण उन्हें यह आंदोलनात्मक कदम उठाना पड़ा। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि शासन स्तर से जल्द ही मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो वे अपने आंदोलन को और अधिक उग्र करने के लिए बाध्य होंगे। फिलहाल सभी की निगाहें सरकार के अगले रुख पर टिकी हैं।

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