पार्किंग खाली होने के बावजूद सड़कों पर गाड़ियों की कतारें; अल्मोड़ा-बागेश्वर हाईवे ठप, गरमपानी और खैरना के व्यापारी मंदी झेलने को मजबूर!

शनिवार की भोर होते ही भवाली-अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग पर कैंची धाम के आसपास व्यवस्थाएं एक बार फिर पूरी तरह चरमरा गईं। सुबह 4:00 बजे से ही कैंची धाम क्षेत्र में वाहनों के पहिए थम गए और देखते ही देखते कई किलोमीटर लंबा भीषण ट्रैफिक जाम लग गया। कहीं पहाड़ी से गिरा मलबा तो कहीं सड़क के दोनों किनारों पर बेतरतीब पार्क की गई गाड़ियां इस स्थिति को और भयावह बना रही हैं। हैरानी की बात यह है कि कैंची धाम में अधिकृत पार्किंग सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद गाड़ियां मुख्य हाईवे पर खड़ी की जा रही हैं, और जिम्मेदार प्रशासन पूरी तरह मौन साधे बैठा है।

इस कुप्रबंधन की सबसे बड़ी कीमत अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और रानीखेत जाने वाले आम राहगीरों और यात्रियों को चुकानी पड़ रही है। आपातकालीन स्थिति में अस्पताल जा रहे मरीजों, ट्रेन पकड़ने वाले यात्रियों और समय से गंतव्य तक पहुँचने वाली बसों का शेड्यूल पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। जाम के कारण कई यात्रियों की ट्रेनें और बसें छूट रही हैं, जिससे मजबूर होकर लोगों को अपने सफर के लिए एक दिन पहले निकलने का जोखिम उठाना पड़ रहा है। यही नहीं, जाम में फंसने से बचने के लिए यात्रियों को मजबूरन लंबा और खर्चीला वैकल्पिक मार्ग चुनना पड़ रहा है, जिससे उनकी जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।

व्यापार ठप, सन्नाटे में बाज़ार विडंबना यह है कि कैंची धाम मंदिर के पास जहां चहल-पहल बनी हुई है, वहीं महज 5 किलोमीटर नीचे स्थित गरमपानी, खैरना के मुख्य व्यावसायिक बाजार पूरी तरह सन्नाटे में डूबे हैं। रूट डायवर्जन और जाम के डर से ग्राहक इन बाजारों तक पहुँच ही नहीं पा रहे हैं, जिससे स्थानीय व्यापारी हाथ पर हाथ धरे बैठने को मजबूर हैं।

प्रशासन से जनता के सीधे सवाल:

  • जब मल्टीलेवल पार्किंग मौजूद है, तो सड़क किनारे गाड़ियां खड़ी करने वालों पर सख्त कार्रवाई क्यों नहीं होती?
  • क्या किसी गंभीर मरीज के साथ अनहोनी होने के बाद ही पुलिस और प्रशासन की नींद टूटेगी?

जनता अब कोरे आश्वासनों से ऊब चुकी है। यदि हाईवे पर पुलिस बल की स्थाई तैनाती और यातायात नियमों का सख्ती से पालन नहीं कराया गया, तो स्थानीय निवासियों का आक्रोश कभी भी सड़कों पर दिखाई दे सकता है।

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