गरमपानी– भवाली अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग पर गंगोरी से गंगरकोट तक भू-धंसाव की स्थिति लगातार भयावह होती जा रही है। अब भू-धंसाव सिर्फ सड़क तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी चपेट में आबादी और सरकारी भवन भी आने लगे हैं। कई स्थानों पर जमीन तीन फीट से अधिक धंस चुकी है। मकानों और दुकानों में बढ़ती दरारों के बीच गंगोरी की ग्राम प्रधान नीमा देवी के घर छोड़कर सुरक्षित स्थान पर जाने के बाद अब कई अन्य ग्रामीण भी अपने घर खाली करने की तैयारी में जुट गए हैं। लगातार बारिश के बीच जमीन खिसकने का सिलसिला जारी रहने से लोगों में किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है।
जिसमें स्थिति की गंभीरता को देखते हुए श्री कैंची धाम के उपजिलाधिकारी अनुराग आर्य, तहसीलदार बीसी भंडारी और राजस्व विभाग की टीम ने गुरुवार को गंगोरी से गंगरकोट तक प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने भू-धंसाव और भवनों की स्थिति का जायजा लेते हुए ग्रामीणों को निर्देश दिए कि जहां भू-धंसाव अधिक हो रहा है या भवन असुरक्षित नजर आ रहे हैं, वहां किसी भी तरह का जोखिम न उठाएं और तत्काल सुरक्षित भवनों में चले जाएं।
भू-धंसाव का असर अब जवाहर नवोदय विद्यालय के भवन तक पहुंचने से खतरा और गंभीर हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले वर्ष भी राजमार्ग पर बड़े पैमाने पर भू-धंसाव हुआ था, लेकिन प्रभावित हिस्से में डामरीकरण कर सड़क को तो सुचारू कर दिया गया, मगर जमीन धंसने के मूल कारण का स्थायी उपचार नहीं किया गया। यही वजह है कि बारिश के साथ इस बार समस्या और विकराल होती जा रही है और सड़क के बाद अब मकानों, दुकानों तथा विद्यालय भवन पर खतरा मंडराने लगा है।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि यदि समय रहते भू-वैज्ञानिक जांच और स्थायी उपचार नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में नुकसान का दायरा कितना बढ़ेगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल होगा। लोगों ने प्रशासन और एनएच विभाग से महज सड़क पर डामरीकरण करने के बजाय गंगोरी से गंगरकोट तक पूरे प्रभावित क्षेत्र का वैज्ञानिक सर्वे कराने, खतरे में आए परिवारों को सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने और भू-धंसाव रोकने के लिए स्थायी उपाय करने की मांग की है।
जिसमें उपजिलाधिकारी अनुराग आर्य ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए विभागीय टीम ने तत्काल मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया है। भू-वैज्ञानिक को प्रभावित क्षेत्र का सर्वे करने के लिए लिखा गया है। जल्द ही भू-वैज्ञानिक सर्वे शुरू कराया जाएगा, ताकि भू-धंसाव के कारणों का पता लगाकर आगे की कार्रवाई की जा सके।

















