नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर नीट (NEET) परीक्षा में धांधली और पेपर लीक के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन लगातार तीखा होता जा रहा है. ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के इस प्रदर्शन में शामिल शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक के आमरण अनशन का गुरुवार को 19वां दिन था. लगातार उपवास के कारण उनका वजन 9 किलोग्राम से अधिक घटकर अब केवल 56.90 किलो रह गया है.
डॉक्टरों ने बताया ‘मेडिकल इमरजेंसी’
गुरुवार को जारी मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, वांगचुक का रक्तचाप (BP) 101/65 mmHg और पल्स 72 प्रति मिनट दर्ज की गई है. यद्यपि वे मानसिक रूप से पूरी तरह सतर्क हैं, लेकिन शरीर बेहद कमजोर हो चुका है.
‘एशियन सोसाइटी ऑफ इमरजेंसी मेडिसिन’ के पूर्व प्रेसिडेंट डॉ. टमोरिश कोले ने चेतावनी दी है कि इस स्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता:
“लंबे उपवास के दौरान शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स (जैसे पोटेशियम, मैग्नीशियम) तेजी से कम होते हैं। इससे दिल की धड़कन अनियमित (एरिथमिया) हो सकती है, जो अचानक कार्डियक अरेस्ट की वजह बन सकती है। यह स्थिति कभी भी गंभीर मेडिकल इमरजेंसी का रूप ले सकती है।”
कोर्ट का निर्देश और विपक्ष की अपील
सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत पर दिल्ली हाई कोर्ट ने भी चिंता जताई है और सरकार को उनकी रोजाना जांच के सख्त निर्देश दिए हैं. अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी और उद्धव ठाकरे जैसे दिग्गज नेताओं ने उनसे अनशन खत्म करने की भावुक अपील की है.
हालांकि, वांगचुक ने अनशन तोड़ने से इनकार करते हुए समर्थकों से कहा है:
“मुझसे अनशन खत्म करने को कहने के बजाय, आप सभी 20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन आयोजित शांतिपूर्ण ‘संसद मार्च’ में शामिल हों।”आंदोलन की प्रमुख मांगें:
- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तुरंत इस्तीफा.
- देश की परीक्षा प्रणाली में पारदर्शी और व्यापक सुधार.
- हाल के वर्षों में पेपर लीक और धांधली के दोषियों पर कड़ी कार्रवाई.

















