(वित्त मंत्री ने बजट भाषण में पांच बार महिलाओं का जिक्र किया लेकिन महिलाओं को महंगाई, बेरोजगारी, कुपोषण, असुरक्षा से कोई बजट में राहत नहीं)
अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ( एडवा) की प्रदेशाध्यक्ष एडवोकेट सुनीता पांडेय ने केन्द्रीय बजट को महिला विरोधी बजट बताया है। सुनीता पांडेय ने एक बयान जारी कर कहा अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ने केंद्रीय बजट में महिलाओं की अनदेखी पर तीव्र रोष व्यक्त करते हुए इसे महिला विरोधी, जनता विरोधी बताया।
जनवादी महिला समिति की राज्य अध्यक्ष सुनीता पाण्डे और ने कहा कि वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में “महिलाओं” का ज़िक्र पांच बार किया, लेकिन महिलाओं को मंहगाई , बेरोजगारी, गरीबी, कुपोषण, असुरक्षा आदि से राहत देने के लिए बजट में कुछ नहीं किया गया।
महिला एवं बाल मंत्रालय का बजट कुल बजटीय खर्च का 0.53% से घटकर 0.05% हो गया है। यह दिखाता है कि भाजपा सरकार की महिलाओं के जीवन और आजीविका की समस्या की घोर उपेक्षा कर रही है। जेंडर बजटिंग भी जीडीपी के 1.61% से घटकर 1.38% हो गया है। यह महिलाओं के साथ घोर अन्याय है।
वित्त मंत्री ने प्रयोगशालाओं में लंबे समय तक काम करने वाली छात्राओं के प्रति चिंता जताते हुए जिला स्तर पर महिला हॉस्टल खोलने के लिए बजटीय सहायता की घोषणा की है। दरअसल इसकी जड़ यह है कि देश में सुरक्षा की कमी है और महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं, जिसका उन्होंने ज़िक्र तक नहीं किया। उनकी चिंता के बावजूद, बजटीय आवंटन में, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, वन स्टॉप सेंटर, नारी अदालत, महिला हेल्पलाइन आदि पर खर्च 629 करोड़ रुपये से घटाकर 627 करोड़ रुपये कर दिया है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, पीएम पोषण, पीएम श्री, पीएम जेएवाई, पीएम एवाई जैसी कई चर्चित केंद्रीय योजनाओं में खर्च कम किया गया है। उर्वरक और खाद्य सब्सिडी में भी कटौती की गई है, जिससे किसानों की खेती की लागत बढ़ गई है। सार्वजनिक राशन वितरण प्रणाली योजना को मज़बूत करने के लिए आवंटन में कोई वृद्धि नहीं हुई है। आंगनवाड़ी, आशा और मिड-डे-मील महिलाओं को रोज़गार देने वाली योजनाओं के बजटीय आवंटन में कोई वृद्धि नहीं हुई है। बजट इनोवेटिव फाइनेंस के तरीकों पर भी चुप है। जबकि महिलाएं बड़ी संख्या में माइक्रोफाइनेंस कंपनियों के जाल फंसी हुई हैं। प्राइमरी हेल्थ केयर की उपेक्षा की गई है, खासकर महिलाओं में एनीमिया की, जो नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे डेटा में पहचानी गई एक आम स्वास्थ्य समस्या है। वित्त मंत्री ने देखभाल के काम के लिए ट्रेनिंग की घोषणा की, जबकि देश में महिलाओं पर बिना वेतन वाले देखभाल के काम के बढ़ते बोझ को नज़र अंदाज़ किया गया है।बजट ने वंचित समुदायों की महिलाओं के लिए वास्तविक आवंटन में भारी कमी की है। जनवादी महिला समिति बजट 2026-27 का विरोध करती है क्योंकि यह देश की बुरी तरह प्रभावित वंचित महिलाओं की चिंताओं को नज़र अंदाज़ करता है और महिला विरोधी बजट के खिलाफ लामबंद होने का आह्वान करती है।
















