
( उक्रांद व कांग्रेस से ज्ञापन के माध्यम से विपक्ष की सशक्त भूमिका निभाने का अनुरोध किया)
अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की राज्य इकाई अध्यक्ष एडवोकेट सुनीता पांडेय के नेतृत्व में महिला आरक्षण विधेयक को पारित कराये जाने हेतु कांग्रेस बारामंडल विधायक मनोज तिवारी व उक्रांद नेताओं गिरीश नाथ गोस्वामी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया
जैसा कि विदित है कि महिलाओं को लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने का सवाल बरसों से राजनीतिक गोलबंदियों और बहस के चक्रव्यूह में फंसा हुआ है। इस पूरे सियासी ध्रुवीकरण के केंद्र से महिलाओं की मूल आवाज को ही गायब कर दिया गया। पुरुषों की राजनीतिक सोच इस कदर हावी रही कि वही तय करते रहे कि महिलाओं को कितना और कैसे आरक्षण मिले। लेकिन आज आधी आबादी लामबंद होकर नेतृत्व को याद दिला रही है कि उनके फैसले महिलाओं की मर्जी के बिना नहीं हो सकते।
आगामी मॉनसून सत्र में महिला आरक्षण एक अहम मुद्दा बनने जा रहा है, लिहाजा विभिन्न महिला संगठनों का एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल राजनीतिक दलों से मिलकर दबाव बना रहा है कि अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। महिलाओं की दो टूक मांग है कि साल 2023 के मूल विधेयक को जनगणना और परिसीमन (Delimitation) के पेंच से पूरी तरह बाहर रखकर तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए, अन्यथा जटिल कानूनी प्रक्रियाओं के कारण यह बिल अनंत काल तक के लिए लटक जाएगा। ज्ञापन देने वालों में अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति उत्तराखंड की राज्य अध्यक्ष सुनीता पांडे, जिला उपाध्यक्ष जया पांडे,राज्य कोषाध्यक्ष राधा नेगी, सदस्य सरस्वती, गीता जोशी आदि थे।
















