अल्मोड़ा-हल्द्वानी राष्ट्रीय राजमार्ग पर सफर करना इन दिनों आम जनता, दैनिक यात्रियों और स्थानीय निवासियों के लिए किसी नारकीय यातना से कम नहीं रह गया है। प्रसिद्ध सिद्धपीठ श्री कैंची धाम में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण पूरा हाईवे बुरी तरह हांफ रहा है। जो समस्या कुछ समय पहले तक महज वीकेंड (शनिवार और रविवार) तक सीमित मानी जाती थी, अब वह पूरे हफ्ते का स्थायी दर्द बन चुकी है। कैंची धाम से लेकर भवाली और गरमपानी तक रोजाना लग रहे कई किलोमीटर लंबे भीषण जाम ने यातायात व्यवस्था और प्रशासनिक दावों की पोल खोलकर रख दी है।
एक ओर जहां कैंची धाम में बाबा नीम करौली के दर्शन के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ रहा है और तिल रखने तक की जगह नहीं है, वहीं महज कुछ किलोमीटर दूर स्थित गरमपानी खैरना, छड़ा और चमड़िया के मुख्य बाजार पूरी तरह वीरान पड़े हैं।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि अव्यवस्थित यातायात और पुलिस के एकतरफा डायवर्जन के कारण बाहरी गाड़ियां और पर्यटक इन बाजारों तक पहुंच ही नहीं पा रहे हैं। होटल, लॉज और ढाबे पूरी तरह खाली पड़े हैं। व्यापारियों का आक्रोश है कि उनका काम-धंधा पूरी तरह चौपट हो चुका है, लेकिन जिला व पुलिस प्रशासन ने अपनी आंखें मूंद रखी हैं। व्यापारियों का आरोप है कि प्रशासन को कैंची धाम के अलावा आसपास के अन्य व्यापारिक क्षेत्रों और स्थानीय जनता की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं रह गया है। सालों से यही स्थिति बनी हुई है और दिन-प्रतिदिन हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं, लेकिन कोई भी अधिकारी इसकी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है।
इस भीषण जाम की सबसे बड़ी मार उन आम यात्रियों पर पड़ रही है, जिन्हें अल्मोड़ा, रानीखेत, बागेश्वर, पिथौरागढ़ जैसे पर्वतीय जिलों में अपने गंतव्य तक पहुंचना होता है। जाम में फंसे यात्रियों की बेबसी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सुबह 6:30 बजे हल्द्वानी या काठगोदाम से चले लोग शाम 4:00 बजे जाकर जैसे-तैसे गरमपानी पहुंच पा रहे हैं।
घंटों तक गाड़ियों में कैद रहने के कारण छोटे-छोटे बच्चे भूख-प्यास और गर्मी से बिलखने को मजबूर हैं। बीमार मरीजों, बुजुर्गों और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए जा रहे युवाओं का बुरा हाल है। कई यात्रियों की ट्रेनें और आवश्यक काम छूट रहे हैं।
यात्रियों का आरोप है कि पुलिस प्रशासन का रूट डायवर्जन प्लान भी पूरी तरह पक्षपातपूर्ण और अव्यवहारिक है। बाहर से आने वाले पर्यटक वाहनों को नियंत्रित करने में तो प्रशासन नाकाम साबित हो रहा है, लेकिन अल्मोड़ा, रानीखेत और बागेश्वर जाने वाले स्थानीय निवासियों व दैनिक यात्रियों को जबरन रामगढ़ जैसे लंबे और चक्करदार रास्तों से जाने के लिए मजबूर कर दिया जाता है।
इस वजह से जहां 2 से 3 घंटे का सफर 5 से 6 घंटे में तब्दील हो रहा है, वहीं यात्रियों को अपनी जेब भी ढीली करनी पड़ रही है। जीप और बस संचालकों द्वारा लंबे रास्ते का बहाना बनाकर यात्रियों से दुगना किराया वसूला जा रहा है। जैसे-तैसे अपनी यात्रा का बजट जुटाने वाले गरीब और मध्यमवर्गीय लोगों पर यह दोहरी आर्थिक मार पड़ रही है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों, व्यापारियों और आम जनता का कहना है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही खैरना, गरमपानी और कैंची क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर, बेतरतीब पार्किंग पर सख्ती नहीं की और ठोस पार्किंग-शटल व्यवस्था लागू नहीं की, तो स्थिति और ज्यादा भयावह हो जाएगी। व्यापारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनके रोजगार को बचाने और राजमार्ग को जाम मुक्त करने के लिए तत्काल कदम नहीं उठाए गए, तो वे सड़कों पर उतरकर व्यापक जनआंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।


















