
( जितना पानी का उपयोग उतना ही बिल भवनकर के आधार पर जल मूल्य निर्धारण से मिलेगी जनता को राहत)
भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य राजीव गुरुरानी ने प्रदेश सरकार द्वारा नगर निगम क्षेत्रों में पानी के मीटर लगा कर खपत के आधार पर बिल लेने के निर्णय का किया स्वागत किया है।
राजीव गुरुरानी एक बयान जारी कर कहा है प्रदेश सरकार के निर्देश पर प्रमुख सचिव आनंद वर्धन द्वारा जल संस्थान के महाप्रबंधक को समस्त नगर निगम क्षेत्रों में वाटर सप्लाई मीटर लगाने के दिए गए गये है।
राजीव गुरुरानी ने कहा है कि पर्वतीय क्षेत्रों में अब तक नगर निगम / नगर पालिका के भवन कर निर्धारण हेतु पंचवर्षीय मूल्यांकन के आधार पर जल मूल्य के मानक तीन स्लैब में निर्धारित किए गए थे, जो व्यवहारिक नहीं थे। इस व्यवस्था से आम जनता काफी आहत थी और कई स्थानों पर मीटर आधारित जल आपूर्ति की मांग को लेकर आंदोलन भी हुए थे।राजीव गुरुरानी ने कहा कि एक घर में रहने वाले दो लोगों और दूसरे घर में रहने वाले दस लोगों से समान जल मूल्य लिया जाना न्यायसंगत नहीं था। मीटर आधारित प्रणाली लागू होने से “जितना उपयोग, उतना भुगतान” का सिद्धांत लागू होगा, जिससे पारदर्शिता और समानता सुनिश्चित होगी।
उन्होंने प्रदेश सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह कदम जनहित में है और उत्तराखंड की जनता इस फैसले का समर्थन करती है। साथ ही उन्होंने जल संस्थान के महाप्रबंधक को पत्र लिखकर प्रतिवर्ष जल मूल्य में की जाने वाली 12 प्रतिशत वृद्धि को समाप्त करने का भी आग्रह किया है।राजीव गुरुरानी ने संबंधित विभाग से शीघ्रातिशीघ्र नगर निगम क्षेत्रों में वाटर सप्लाई मीटर लगाने की प्रक्रिया शुरू करने का अनुरोध किया, ताकि आम नागरिकों को राहत मिल सके और जल प्रबंधन व्यवस्था अधिक प्रभावी बन सके।
काफी समय पर जल संस्थान द्वारा शहरी क्षेत्रों के मकानों में नगर पालिका/ नगर निगम के भवन कर मूल्यांकन के आधार पर जलकर वसूला जाता था, जलकर की राशि का जल मूल्य में समायोजित किया जाता था।जन विरोध को देखते हुए जलकर को स्थगित कर जल मूल्य की व्यवस्था दी गयी थी।
अब देखना है कि जलकर समाप्त ही रहेगा, या फिर दोहरी मार तो नहीं?

















