सम्मानित कवि कंचन तिवारी


(कवि कंचन तिवारी को इंडो नैपाल साहित्य गौरव पुरस्कार मिलने पर बधाई देते हुए हर्ष व्यक्त किया
आहटों का दरिया कहीं बह न निकले
मैंने पैरों को ही सन्नाटों से बांध दिया ।

बाग लै अब जंगल छोड़ि शहरन ऐगौ
ए बै रन उ लै राजनीति करण फैला। ,)
वर्ष 2025 के अंतिम शनिवार का जश्न छंजर सभा ने काव्य गोष्ठी कर मनाया गया। काव्य गोष्ठी काआयोजन स्थानीय हुक्का क्लब  में किया गया । काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता जन कवि आदरणीय जनार्दन उप्रेती “जनुदा” जी ने की और गोष्टी का संचालन नीरज पंत ने किया। ।
उपस्थित कवियों ने बेहतरीन प्रस्तुतियां दीं……
गोष्ठी का प्रारंभ कवि दिनेश चंद्र पांडे ने किया… “मानव ने क्या-क्या रच डाला
मानव को दानव बना डाला
करुणा दया को भुला डाला
पर पीर पर मुस्कुराना सीख डाला
प्रभु एक ऐसी ज्योति जगा दो
पर पीर हरने को कोटि कर उठे ।”दिनेश चंद्र” पांडे”

नवल सवेरा आया है
सुखद लालिमा लाया है
चिड़िया चहकी पेड़ों पर
भौरें गुनगुन फूलों पर
नव विहान की नव उमंग
लेकर सूरज आया है ।
 “डॉ धारा बल्लभ पांडे”
आओ नव वर्ष नई उम्मीदों के साथ आओ
किंतु पुरानी यादों को भुलाना मत
क्योंकि अब इतनी ख्वाहिश ही कहां रही
कि सिर्फ नई उम्मीदों में जिया जा सके ।
  “डॉ रमेश चंद्र लोहुमी”
पुराण दिन्कि सासु  नई जमाणाकि  ब्वैरि
सासुक मुखलै  गोबर माटो छू
ब्वैरिक मुखलै किरीम
सासु जाई रुकी गाड् खेत् जन्नुदा
ब्वैरिकें ऐ रै नीन —-
    जवानो बदली गो…. ‌”जनार्दन उप्रेती ‘जन्नुदा”
आहटों का दरिया कहीं बह न निकले

मैंने पैरों को ही सन्नाटों से बांध दिया ।

आजा के दिल की धड़कनें, (गीत)
अब तुझसे बात कर रही….
आज जाने क्यों ये चांद इतना मुस्कुरा रहा,
जाने किस पे है नजर जो इतना इतरा रहा
घुल रही फ़िज़ाओं में है खुशबू  तेरे प्यार की
तेज होती सांसें कहतीं दिल कोई चुरा रहा।
आजा के दिल की धड़कनें,
अब तुझसे बात कर रही….
“नीरज पंत”
आहा रे संस्कृति कैं
कस मिलौ फैद
कस लागौ फचैक
यस है गई सरबरू
मैं बांजि कुड़िक पहरू रे
बांजि कुड़िक पहरू।
“त्रिभुवन गिरी महाराज”
अच्छा भिखारी
कभी भीख नहीं मांगता
वो बस दुआ देता है।
“विपुल जोशी”
बाग लै अब जंगल छोड़ि शहरन ऐगौ
ए बै रन उ लै राजनीति करण फैला।
“कंचन तिवारी”

गोष्ठी के अंत में कवि कंचन तिवारी को मिले इंडो नेपाल साहित्य गौरव पुरस्कार मिलने पर हर्ष व्यक्त किया गया।
( आभार नीरज पंत आख्या व फोटो हेतु)

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