(तीनों सेनाओं की महिला अधिकारियों के नेतृत्व में, 28 महिला कैडेट देश के सबसे चुनौतीपूर्ण मार्गों में से एक को पार करते हुए 250 किलोमीटर की 30 दिवसीय दुर्गम पदयात्रा करेंगी, यह अभियान देश की ‘नारी शक्ति’ के साहस, दृढ़ संकल्प और बढ़ती क्षमताओं का सशक्त प्रमाण है। राजनाथ सिंह)

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 1 नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) की प्रमुख साहसिक गतिविधि- अखिल भारतीय बालिका अधिक ऊंचाई दुर्गम पदयात्रा (ट्रेक) ‘अपराजिता – परंग ला 2026’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह ट्रेक परंग ला दर्रे (5,578 मीटर, 18,300 फीट) से होकर गुजरेगा, जो हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी को लद्दाख के चांगथांग क्षेत्र से जोड़ता है और इसे देश के सबसे चुनौतीपूर्ण उच्च-ऊंचाई वाले दुर्गम पदयात्रा मार्गों में से एक माना जाता है।इस दल का नेतृत्व तीनों सेनाओं की तीन महिला अधिकारी करेंगी।

इस अभियान में 28 कैडेट भाग ले रही हैं, जिनकी औसत आयु 19 वर्ष है, और सबसे कम उम्र की प्रतिभागी मात्र साढ़े 16 वर्ष की है। इस अवसर पर अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने इतनी चुनौतीपूर्ण उच्च-ऊंचाई वाले अभियान में युवा लड़कियों की भागीदारी को देश की महिलाओं के साहस, दृढ़ संकल्प और बढ़ती क्षमताओं का सशक्त प्रमाण बताया।अधिकारियों, चिकित्सा कर्मियों, प्रशिक्षकों और सहायक कर्मचारियों के साथ यह अभियान दल हिमालय के कुछ सबसे दूरस्थ और चुनौतीपूर्ण इलाकों से होते हुए लगभग 250 किलोमीटर की दूरी 30 दिनों में तय करेगा।

अभियान के मार्ग में किब्बर, दुमला, थलटक, बोंगरोजेन, परांग ला दर्रा, डाक कारज़ोंग, नोर्बू सुम्दो, कियांगडोम और कोरज़ोक शामिल हैं, जो उच्च ऊंचाई वाले रेगिस्तानों, ग्लेशियरों, बर्फ के मैदानों और नदी घाटियों के पार हैं।


राजनाथ सिंह ने अभियान दल को सुरक्षित और सफल ट्रेक के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस तरह के अभियान युवाओं में नेतृत्व क्षमता, मानसिक दृढ़ता, अनुशासन और आत्मविश्वास विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने चयनित कैडेटों की शारीरिक और मानसिक तैयारी की सराहना करते हुए कहा कि यह ट्रेक उनके लिए दृढ़ता, आत्मविश्वास और आत्म-खोज का एक जीवन-स्मृति पाठ होगा। उन्होंने आशा व्यक्त की, “कैडेट परांग ला से न केवल यादगार अनुभव लेकर लौटेंगे, बल्कि अपनी आंतरिक शक्ति की गहरी समझ भी प्राप्त करेंगे।”रक्षा मंत्री ने दल के सदस्यों से आग्रह किया कि वे पूरे अभियान के दौरान ‘सुरक्षा’, ‘पर्यावरण’ और ‘स्थानीय समुदायों के साथ संपर्क’ को प्राथमिकता दें। उन्होंने कैडेटों से कहा, “प्रशिक्षकों के निर्देशों का सख्ती से पालन करें, अनावश्यक जोखिमों से बचें और हिमालयी पर्यावरण की रक्षा के लिए कोई कचरा नहीं करने का दृष्टिकोण अपनाएं। स्थानीय समुदायों के साथ सम्मानपूर्वक जुड़ें, उनकी संस्कृति और परंपराओं को समझें और उनके अनुभवों से सीखें।

यह अभियान आपके जीवन में एक महत्वपूर्ण पड़ाव बनेगा और आपको जीवन के हर पड़ाव पर ‘अपराजिता’ बने रहने के लिए प्रेरित करेगा।”
भूमि, जल और वायु में साहसिक गतिविधियों में एनसीसी कैडेटों की बढ़ती उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए श्री राजनाथ सिंह ने नारी शक्ति की भावना को प्रदर्शित करने वाली महिला कैडेटों की सराहना की। उन्होंने अखिल भारतीय एनसीसी निदेशालयों से कैडेटों की भागीदारी पर जोर देते हुए कहा कि उनकी विविध भाषाएं, संस्कृतियां और पृष्ठभूमियां, एक साझा मिशन से एकजुट होकर, ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना का उदाहरण प्रस्तुत करती हैं।
इस अवसर पर एनसीसी के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल वीरेंद्र वत्स और एनसीसी एवं रक्षा मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। यह अभियान दो चरणों में आयोजित किया जा रहा है। भाबा-पिन घाटी क्षेत्र में तैयारी और अनुकूलन के लिए एक ट्रेक आयोजित किया गया, जिसके बाद योग्यता के आधार पर एनसीसी महिला कैडेटों की अंतिम टीम का चयन किया गया। इस अभियान का उद्देश्य एनसीसी महिला कैडेटों में नारी शक्ति, नेतृत्व, आत्मविश्वास, टीम वर्क, सहनशक्ति और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना है।

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