उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में बेटियों को गुणवत्तापूर्ण और सुलभ शिक्षा देने के सरकारी दावों की हवा निकलती नजर आ रही है। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज (जीजीआईसी) बेतालघाट में लंबे समय से जारी शिक्षकों के टोटे के कारण आखिरकार छात्राओं और अभिभावकों के सब्र का बांध टूट गया। आगामी बोर्ड परीक्षाओं को देखते हुए पढ़ाई ठप होने से आक्रोशित छात्राओं ने गुरुवार को सड़कों पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया और खंड शिक्षा कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा।

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खंड शिक्षा कार्यालय जाने से पहले छात्राओं और अभिभावकों ने बेतालघाट बाजार में रैली निकालकर प्रदर्शन किया। छात्राओं का कहना था कि विद्यालय में विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों के लगभग 12 शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। बोर्ड परीक्षाएं बिल्कुल नजदीक हैं और यही तैयारी का सबसे मुख्य समय है, लेकिन शिक्षक न होने से उनका भविष्य अधर में लटक गया है। छात्राओं ने भावुक और कड़े स्वर में कहा कि उन्हें किसी विशेष सुविधा की आवश्यकता नहीं है, वे केवल अपने अधिकार के अनुरूप सभी विषयों के शिक्षक और नियमित कक्षाएं चाहती हैं।

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मामले में प्रशासनिक लापरवाही भी साफ उजागर हो रही है। अभिभावक संघ और विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) ने 22 सितंबर को मुख्य शिक्षा अधिकारी नैनीताल और खंड शिक्षा अधिकारी को इस गंभीर समस्या से अवगत कराया था। इसके बाद जिलाधिकारी स्तर से विद्यालय में सात विषयों के अध्यापकों की तैनाती के स्पष्ट आदेश भी दिए गए थे। बावजूद इसके, संबंधित शिक्षकों द्वारा कार्यभार ग्रहण न करने के कारण स्थिति जस की तस बनी हुई है।

प्रदर्शन में शामिल अभिभावकों ने कहा कि एक तरफ सरकारी मंचों से ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ और सरकारी स्कूलों के कायाकल्प के दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर बुनियादी शिक्षा पाने के लिए बेटियों को सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि रिक्त पदों पर शिक्षकों की तत्काल तैनाती कर पढ़ाई व्यवस्था पटरी पर नहीं लाई गई, तो क्षेत्रवासी व्यापक आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

इस विरोध-प्रदर्शन के दौरान चापड़ की ग्राम प्रधान भावना पडियार, क्षेत्र पंचायत सदस्य मीना देवी, व्यापार मंडल अध्यक्ष तारा सिंह भंडारी, SMC अध्यक्ष जीवंती देवी, रंजन डॉर्बी, गौरव जोशी, दीपक पडियार, सुरेश आर्या और महेश कुमार सहित कई स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं अभिभावक मौजूद रहे।

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