( नैनीताल जनपद पुलिस व जिला प्रशासन की जरूरत से ज्यादा सख्ती और आस्था का धाम पुलिस छावनी में तब्दील करना, स्थानीय व्यापारियों की तथा जन मानस की उपेक्षा करना भी मुख्य कारण रहा भक्तों के न आने का कारण, सबक लेने की जरूरत है सभी को।)
विश्व प्रसिद्ध बाबा नीम करौली महाराज के श्री कैंची धाम स्थापना दिवस मेले में इस वर्ष उम्मीद से बेहद कम भीड़ पहुंची। जहां प्रशासन पिछले वर्षों की तरह 2 से 3 लाख श्रद्धालुओं के आने का दावा कर रहा था, वहीं जमीनी स्तर पर यह संख्या महज 1लाख के आसपास सिमट कर रह गई। इस भारी गिरावट के पीछे पुलिस प्रशासन की अत्यधिक सख्ती और रूट डायवर्जन को मुख्य कारण माना जा रहा है, जिससे स्थानीय व्यापारी और सेवादार बेहद नाखुश हैं।
13 तारीख से बंदिशें लगा दी गयीं,क्या यह जरूरत थी या जल्दबाजी?व्यापारियों का आरोप है कि मेला 15 जून को था, लेकिन प्रशासन ने 13 जून से ही भवाली से खैरना मार्ग पर वाहनों की आवाजाही को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया। स्थानीय दुकानदारों का कहना है पुलिस प्रशासन नेअनावश्यक सख्ती दिखाई।
मेले से दो दिन पहले ही रास्ते पूरी तरह बंद करने की कोई ठोस जरूरत नहीं थी।आर्थिक नुकसान: 13 और 14 जून को वीकेंड (शनिवार-रविवार) होने के कारण भारी मात्रा में पर्यटक आने वाले थे, जिससे व्यापारियों की अच्छी कमाई होती। लेकिन जीरो जोन और सख्त चेकिंग के डर से सामान्य पर्यटकों ने इस रूट से दूरी बना ली।कंट्रोल रूम की व्यवस्थाओं, चार सुपर जोन की सुरक्षा और हर जगह पुलिस व पैरा मिलिट्री की तैनाती ने सुरक्षा तो मजबूत की, लेकिन आम जनता और भक्तों के लिए यह किसी मानसिक प्रताड़ना जैसा साबित हुआ। कई किलोमीटर पहले गाड़ियां रोके जाने के कारण बुजुर्ग और बच्चों को पैदल चलना पड़ा।सेवादारों और स्थानीय जनता के अनुसार, प्रशासन ने सुरक्षा और वीआईपी मूवमेंट के नाम पर “ओवर-मैनेजमेंट” (ज़रूरत से ज़्यादा कड़ाई) कर दिया। बिना उचित विकल्प और सुगम शटल सेवा के 13 तारीख से ही भवाली-खैरना मार्ग बंद करने के फैसले ने स्थानीय पर्यटन और व्यापार की कमर तोड़ दी, जिससे करोड़ों का नुकसान हुआ है।

















