गरमपानी: अल्मोड़ा-हल्द्वानी राजमार्ग पर स्थित खैरना, गरमपानी और छड़ा क्षेत्र के होटल और ढाबा कारोबारी इन दिनों अस्तित्व के संकट से जूझ रहे हैं। एक ओर सरकार द्वारा कमर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति पर लगाई गई अघोषित रोक ने चूल्हों की आग ठंडी कर दी है, तो दूसरी ओर विश्व प्रसिद्ध कैंची धाम में लगने वाले भीषण जाम ने पर्यटकों को इन बाजारों तक पहुँचने से पहले ही रोक दिया है। व्यापारियों का आरोप है कि प्रशासन उनके साथ सौतेला व्यवहार कर रहा है।

​पिछले कुछ दिनों से उत्तराखंड के कई हिस्सों सहित इस पर्वतीय क्षेत्र में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की किल्लत चरम पर है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि प्रशासन और गैस एजेंसियों ने व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए सिलेंडर देने से मना कर दिया है। मजबूरन, आधुनिक युग में भी होटल स्वामी पुराने जमाने की तरह लकड़ियों पर खाना बनाने को विवश हैं। लकड़ी पर खाना बनाना न केवल श्रमसाध्य है, बल्कि इससे समय भी अधिक लगता है और धुएं के कारण काम करना दूभर हो गया है। व्यापारियों का कहना है कि “जैसे-तैसे लकड़ी जुटाकर खाना तैयार तो कर रहे हैं, लेकिन खरीदार नदारद हैं।”

​व्यापारियों की दूसरी सबसे बड़ी समस्या कैंची धाम में लगने वाला अंतहीन ट्रैफिक जाम है। बाबा नीम करोली महाराज के दर्शन के लिए उमड़ने वाली भारी भीड़ के कारण भवाली से लेकर कैंची तक घंटों लंबा जाम लग रहा है। प्रशासन द्वारा यातायात को नियंत्रित करने के लिए अक्सर वाहनों को भवाली या उससे पहले ही रोक दिया जाता है, जिससे खैरना और गरमपानी तक पहुँचने वाले पर्यटकों की संख्या न के बराबर रह गई है। होटल स्वामियों का कहना है कि वे सुबह से खाना बनाकर पर्यटकों का इंतजार करते हैं, लेकिन शाम तक उनकी मेजें खाली रहती हैं

गरमपानी ​खैरना और छड़ा के स्थानीय व्यापारियों में प्रशासन के खिलाफ भारी रोष है। उनका कहना है कि एक तरफ सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ बुनियादी सुविधाएं जैसे व्यावसायिक गैस छीन ली गई है। व्यापारियों का सीधा सवाल है कि “जब कैंची धाम में जाम की समस्या है, तो उसका खामियाजा मील दूर बैठे खैरना के व्यापारियों को क्यों भुगतना पड़ रहा है?”

  • ​कमर्शियल गैस की तत्काल बहाली: व्यापारियों ने मांग की है कि उन्हें प्राथमिकता के आधार पर गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए जाएं।
  • ​यातायात प्रबंधन: बाईपास का निर्माण कार्य तेज किया जाए और तब तक ऐसी व्यवस्था बने कि खैरना-अल्मोड़ा जाने वाला ट्रैफिक प्रभावित न हो।
  • ​आर्थिक क्षति: सीजन के समय भी कारोबार ठप होने से बैंक की किस्तें और कर्मचारियों का वेतन निकालना मुश्किल हो गया है।

​स्थानीय व्यापार मंडल ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही गैस आपूर्ति सुचारू नहीं की गई और जाम की समस्या का कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया, तो वे उग्र आंदोलन को मजबूर होंगे। फिलहाल, गरमपानी और खैरना के ये बाजार अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं।

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