हल्द्वानी। कुमाऊं की ऐतिहासिक धरती रानीबाग स्थित चित्रेश्वर धाम एक बार फिर कत्यूरी वंशजों की अगाध श्रद्धा और सांस्कृतिक विरासत का गवाह बना। ‘दर्पण न्यूज 24/7’ की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, कुमाऊं और गढ़वाल के कोने-कोने से आए हजारों कत्यूरी वंशजों ने अपनी आराध्य देवी माता जियारानी के दर्शन कर क्षेत्र को भक्तिमय कर दिया।

आस्था की डुबकी और वीरगाथा का गान

​मेले का शुभारंभ गार्गी (गोला) नदी के पवित्र तट पर स्नान के साथ हुआ। कत्यूरी परिवारों ने अपनी कुलदेवी की प्राचीन गुफा में मत्था टेका और सुख-समृद्धि की कामना की। ढोल-दमाऊं, नगाड़े और मसकबीन की गूंज के बीच श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता था। आयोजन की मुख्य विशेषता ‘जियारानी का जागरण’ रही, जहाँ रात भर लोक गायकों ने माता जियारानी के पराक्रम, उनके बलिदान और तैमूर लंग के विरुद्ध उनके युद्ध की वीरगाथाओं का बखान किया।

सांस्कृतिक एकता का केंद्र

​इस समागम में रानीखेत, कोटाबाग, सल्ट, चौखुटिया और रामनगर समेत गढ़वाल मंडल के भी कई कत्यूरी परिवार सम्मिलित हुए। ऐतिहासिक रूप से यह स्थल अत्यंत महत्वपूर्ण है; मान्यता है कि सातवीं सदी में अयोध्या से आए सूर्यवंशी कत्यूरी शासकों ने यहाँ शासन किया था। चित्रशिला क्षेत्र को ब्रह्मा, विष्णु और शिव की त्रिशक्ति का केंद्र माना जाता है।

सेवा और समर्पण की मिसाल

​स्थानीय युवाओं और जनप्रतिनिधियों ने अतिथि देवो भव: की परंपरा को जीवंत करते हुए श्रद्धालुओं के लिए हाई स्कूल में ठहरने और भोजन की नि:शुल्क व्यवस्था की। देर रात तक स्वयंसेवक व्यवस्थाएं बनाने में जुटे रहे, जिससे दूर-दराज से आए भक्तों को कोई असुविधा न हो।

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