( “साहित्य सिर्फ अभिव्यक्ति नहीं राष्ट्र निर्माण की आधार शिला है” के स्लोगन के साथदो दिवसीय कार्यक्रम में अखिल भारतीय साहित्य परिषद के बैनर तले साहित्य सृजन व प्रचार प्रसार पर जोर दिया गया।
दिनांक 7–8 फरवरी 2026 को अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक हुबली, कर्नाटक में सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
इस बैठक में अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुशील चंद्र त्रिवेदी ‘मधुपेश’ जी की गरिमामयी उपस्थिति रही। बैठक में संगठन के विस्तार, साहित्यिक गतिविधियों के सशक्त संचालन तथा आगामी योजनाओं पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई।
“जब नेतृत्व अनुभवी हो और उद्देश्य राष्ट्रहित, तब हर बैठक परिवर्तन की दिशा में एक निर्णायक कदम बन जाती है।”
डॉ. त्रिवेदी ‘मधुपेश’ जी ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि साहित्य केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। उन्होंने साहित्य परिषद् को वैचारिक नेतृत्व का केंद्र बनाते हुए भारतीय संस्कृति, परंपरा और मूल्यों के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए समर्पित भाव से कार्य करने का आह्वान किया।

बैठक में आगामी राष्ट्रीय अधिवेशन, प्रांतीय सम्मेलनों, काव्य गोष्ठियों, लेखन कार्यशालाओं एवं प्रकाशन योजनाओं की रूपरेखा तैयार की गई। डिजिटल माध्यमों के प्रभावी उपयोग, साहित्यिक पत्रिकाओं के सुदृढ़ प्रकाशन तथा नवोदित रचनाकारों के मार्गदर्शन हेतु विशेष समितियों के गठन का निर्णय लिया गया।

पदाधिकारियों ने एक स्वर से यह संकल्प दोहराया कि परिषद् साहित्य को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाने के लिए सतत प्रयासरत रहेगी। आपसी संवाद, सहयोग और समर्पण की भावना से परिपूर्ण यह बैठक संगठनात्मक ऊर्जा और नवचेतना का प्रतीक सिद्ध हुई।

“जब नेतृत्व अनुभवी हो और उद्देश्य राष्ट्रहित, तब हर बैठक परिवर्तन की दिशा में एक निर्णायक कदम बन जाती है।”
इधर अल्मोड़ा में भी अखिल भारतीय साहित्य परिषद जनपद इकाई की अध्यक्ष हेमा आर्या शिल्पी ने बताया कि संगठन अल्मोड़ा में सक्रिय भूमिका अदा परिषद् के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु निरंतर साहित्य सृजन, काव्य गोष्ठी के माध्यम से प्रचार प्रसार हेतु प्रयासरत हैं

ADVERTISEMENTS Ad