ऋषिकेश, 7 अगस्त। श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के पंडित ललित मोहन शर्मा परिसर, ऋषिकेश में उच्च शिक्षा विभाग, उत्तराखंड सरकार एवं भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान (EDII), अहमदाबाद के संयुक्त तत्वावधान में संचालित देवभूमि उद्यमिता योजना 2.0 के अंतर्गत आयोजित सत्र 2026–27 के तीन दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम का तृतीय एवं समापन दिवस अत्यंत उत्साहपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों एवं विभागों के 72 विद्यार्थियों ने सहभागिता करते हुए नवाचार, स्टार्टअप एवं उद्यमिता के व्यावहारिक पहलुओं को समझने में गहरी रुचि दिखाई।


सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन एंटरप्रेन्योरशिप एवं देवभूमि उद्यमिता योजना की नोडल अधिकारी प्रो. अनीता तोमर ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान युग में नवाचार ही प्रगति का आधार है। उन्होंने विद्यार्थियों को स्थानीय समस्याओं की पहचान कर उनके व्यवहारिक एवं तकनीकी समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विशेष रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence), डिजिटल प्लेटफॉर्म, डेटा एनालिटिक्स तथा उभरती प्रौद्योगिकियों का उपयोग करते हुए समाजोपयोगी एवं रोजगार सृजन करने वाले स्टार्टअप विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “सफल उद्यमी वही है जो अवसरों की प्रतीक्षा नहीं करता, बल्कि चुनौतियों को अवसर में बदलने का साहस रखता है।

आज के विद्यार्थी यदि नवाचार, तकनीक और सामाजिक उत्तरदायित्व को साथ लेकर आगे बढ़ें, तो वे आत्मनिर्भर भारत और विकसित उत्तराखंड के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।” उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में उद्यमिता एवं नवाचार की संस्कृति को सशक्त बनाने के लिए ऐसे कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जाते रहेंगे, जिससे विद्यार्थी रोजगार खोजने वाले नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाले युवा उद्यमी बन सकें।


इस अवसर पर देवभूमि उद्यमिता योजना की जिला समन्वयक सुश्री सपना नेगी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि देवभूमि उद्यमिता योजना केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भर एवं नवाचारी उद्यमी बनाने का एक सशक्त मंच है। उन्होंने विद्यार्थियों को योजना के आगामी चरणों—मेंटरशिप, आवासीय बूट कैंप, बिजनेस प्लान विकास, विशेषज्ञ परामर्श तथा सीड फंडिंग—की विस्तृत जानकारी दी और अधिकाधिक विद्यार्थियों से योजना का लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के स्थानीय संसाधनों, पारंपरिक उत्पादों एवं आधुनिक तकनीकों के समन्वय से अनेक सफल स्टार्टअप स्थापित किए जा सकते हैं।


कार्यक्रम का विशेष आकर्षण विश्वविद्यालय के देवभूमि उद्यमिता योजना की सफल युवा उद्यमी मान्या राजपाल एवं उभरते युवा उद्यमी मुस्कान रस्तोगी एवं रोविन रहे। दोनों ने विद्यार्थियों के साथ अपने उद्यमिता अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार देवभूमि उद्यमिता योजना 2.0 के अंतर्गत प्राप्त प्रशिक्षण, विशेषज्ञ मेंटरशिप एवं निरंतर मार्गदर्शन ने उनके व्यवसायिक विचारों को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने विद्यार्थियों को नवाचार, आत्मविश्वास एवं निरंतर सीखने की भावना के साथ अपने स्टार्टअप विचारों को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विद्यार्थियों के साथ संवाद करते हुए अपने स्टार्टअप की यात्रा, प्रारम्भिक चुनौतियों, व्यवसायिक निर्णयों तथा योजना से प्राप्त प्रशिक्षण एवं मेंटरशिप के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि आत्मविश्वास, निरंतर सीखने की इच्छा तथा सही मार्गदर्शन किसी भी व्यवसायिक विचार को सफल उद्यम में परिवर्तित कर सकते हैं। उन्होंने अपने उद्यमिता सफर का श्रेय देवभूमि उद्यमिता योजना तथा नोडल अधिकारी प्रो. अनीता तोमर के सतत मार्गदर्शन एवं प्रेरणा को दिया।


कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने स्टार्टअप पंजीकरण, बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR), वित्तीय सहायता, विपणन रणनीति, निवेशकों तक पहुँच, डिजिटल ब्रांडिंग, ई-कॉमर्स, सीड फंडिंग तथा सरकारी सहायता योजनाओं से संबंधित अनेक प्रश्न पूछे, जिनका सुश्री सपना नेगी द्वारा विस्तारपूर्वक समाधान किया गया। विद्यार्थियों ने आगामी बूट कैंप, प्रशिक्षण एवं मेंटरशिप कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लेने की उत्सुकता व्यक्त की। कार्यक्रम के सफल संचालन एवं विद्यार्थियों के मार्गदर्शन में फैकल्टी मेंटर्स प्रो. धर्मेन्द्र तिवारी एवं डॉ. शालिनी रावत की सक्रिय एवं महत्वपूर्ण भूमिका रही।


अपने संदेश में कुलपति प्रो. अम्बरीश कुमार महाजन ने कहा कि “राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का उद्देश्य विद्यार्थियों में नवाचार, कौशल, उद्यमिता एवं नेतृत्व क्षमता का विकास करना है। देवभूमि उद्यमिता योजना 2.0 इसी दिशा में एक प्रभावी पहल है, जो युवाओं को आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ समाज और राष्ट्र के आर्थिक विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित करती है।””विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानने और उसे सही दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध है। हमें विश्वास है कि इस योजना से जुड़े अनेक विद्यार्थी भविष्य में सफल स्टार्टअप स्थापित कर उत्तराखंड को नवाचार एवं उद्यमिता के क्षेत्र में नई पहचान दिलाएंगे।”

कार्यक्रम की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सभी प्रतिभागियों, विशेषज्ञों एवं आयोजन टीम एवं सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन एंटरप्रेन्योरशिप एवं देवभूमि उद्यमिता योजना की नोडल अधिकारी प्रो. अनीता तोमर को शुभकामनाएँ प्रेषित कीं। उन्होंने कहा कि देवभूमि उद्यमिता योजना 2.0 युवाओं में उद्यमिता, नवाचार, नेतृत्व क्षमता एवं आत्मनिर्भरता की भावना विकसित करने की एक महत्वपूर्ण पहल है, जो उन्हें रोजगार प्राप्त करने के साथ-साथ रोजगार सृजन के लिए भी प्रेरित करती है।
वहीं, परिसर निदेशक प्रो. महावीर सिंह रावत ने अपने संदेश में प्रतिभागियों को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थी नवाचार एवं उद्यमिता के माध्यम से न केवल अपने लिए, बल्कि समाज एवं प्रदेश के लिए भी नए अवसरों का सृजन करेंगे तथा उत्तराखंड को स्टार्टअप एवं नवाचार के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।


तीन दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों एवं विभागों से लगभग 350 विद्यार्थियों ने सहभागिता कर उद्यमिता, नवाचार एवं स्टार्टअप संस्कृति के प्रति अपनी गहरी रुचि प्रदर्शित की। आगामी चरण में विद्यार्थियों के अभिनव व्यवसायिक विचारों का चयन, आइडिया स्क्रीनिंग, विशेषज्ञ मेंटरशिप, आवासीय बूट कैंप, बिजनेस मॉडल विकास, पिचिंग सेशन तथा सीड फंडिंग की प्रक्रिया प्रारम्भ की जाएगी, जिससे चयनित प्रतिभागियों को अपने स्टार्टअप विचारों को सफल उद्यम में विकसित करने का अवसर प्राप्त होगा। कार्यक्रम के सफल समापन के साथ विश्वविद्यालय में नवाचार एवं उद्यमिता के प्रति विद्यार्थियों का उत्साह और अधिक प्रबल हुआ।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने विश्वास व्यक्त किया कि देवभूमि उद्यमिता योजना 2.0 के माध्यम से प्रशिक्षित युवा भविष्य में उत्तराखंड के आर्थिक, सामाजिक एवं नवाचार आधारित विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगे एवं सफल उद्यमी बनकर आत्मनिर्भर उत्तराखंड तथा विकसित भारत @2047 के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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