(वक्ताओं ने श्रृद्धासुमन अर्पित कर प्रथक राज्य के अनुतरित प्रश्नों को फिर दोहराया, प्रथक राज्य के सपने क्या साकार हो पाये?)

उत्तराखंड प्रथक राज्य व के जन आंदोलन के सशक्त हस्ताक्षर डाक्टर शमशेर सिंह बिष्ट को जयंती पर याद किया गया।
वक्ताओं ने श्रृद्धासुमन अर्पित
कर प्रथक राज्य के अनुतरित प्रश्नों को फिर दोहराया, प्रथक राज्य के सपने क्या साकार हो पाये?।
उत्तराखण्ड़ लोक वहिनी ने डा. शमशेर सिंह बिष्ट की 80 वी जयन्ती पर समसामयिक उत्तराखण्ड़ राजनीति एव राष्ट्रीय परिदृश्य पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया ।बैठक में उत्तराखण्ड़ के पिछड़ेपन , अंकिता प्रकरण व भारतीय बजट पर वक्ताओं ने अपने -अपने विचार व्यक्त किये । रेवती बिष्ट की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में डा. शमशेर सिंह बिष्ट को उनकी जयन्ती पर श्रद्धान्जली देते हुए वक्ताओं ने उनके जीवन व कृति पर प्रकाश डाला । इसके अलावा उत्तराखंड राज्य आंदोलन की परिकल्पना व वर्तमान स्थिति पर भी अपने विचार साझा किये। वरिष्ठ टैक्स एडवोकेट जगत सिंह रौतेला ने बजट में उत्तराखण्ड़ को उपेक्षित किये जाने पर आक्रोश व्यक्त किया ।रौतेला ने कहा कि राज्य की स्थाई राजधानी गैरसैण बनाये जाने के बाद ही पहाड़ का विकास संम्भव है ।उत्तराखण्ड़ में थाईलैण्ड की तरह पर्यटन की अवधारणा को पनपाना खतरनाक है, इसे बर्दाश्त नही किया जायेगा।
अंकिता प्रकरण पर सी.बी. आई. जांच मे तेजी लाने की मांग की गई । संचालन करते हुए पूरन चन्द्र तिवारी ने कहा कि सरकार मनमाना यू.जी. सी. कानून लाकर वर्ग संघर्ष को बढा रही है, किसी भी छात्र का उत्पीड़न व जातीय भेदभाव नही होना चाहिये । इस अवसर पर भारतीय बाजार को अमेरिकी किसानों व डेरी उत्पादको के लिये खोले जाने पर आशंका व्यक्त की गई कि इससे भारतीय किसानों को आर्थिक नुकसान होगा। देश में वास्तविक मुद्दों के स्थान पर जातीय व सामप्रदायिक विद्वेष बढ़ाए जा रहें हैं ।बैठक में अजयमित्र सिंह बिष्ट, जंगबहादुर थापा , बिशन दत्त जोशी ,हारिस मुहम्मद , दयाकृष्ण काण्ड़पाल,अजय मेहता,आराध्य आदि मौजूद रहे ।

















