( साहित्यकार कवियत्री मीनू जोशी ने कविता के माध्यम से रंगोत्सव होली पर्व का बखान)
अल्मोड़ा की जानी-मानी साहित्यकार कवियत्री मीनू जोशी ने रंगोत्सव होली का इजहार कविता के माध्यम से किया। इस कविता के एक एक शब्द में त्योहार का महत्व का बखान किया है।
“हौले से खुशियाँ खोलें,
प्रिय के सपनों का द्वार,”
स्नेह और सौहार्द मिला कर
अबीर-गुलाल बनाए,
उमंग और उत्साह घोलकर,
रंग नए सजाए।
मीठी-सी मुस्कान सी गुजिया,
आलू की चटक चपलता,
सौंफ, सुपारी, पान, नारियल,
खुशबू दें गुणवत्ता।
रंगों की बौछार लिए,
जीवन में खिले बहार,
हौले से खुशियाँ खोलें,
प्रिय के सपनों का द्वार।
पिचकारी में घोल प्रेम-रंग,
प्रिय को आज भिगाऊँ,
श्रद्धा और भक्ति से मिश्रित,
पुलकित तिलक लगाऊँ।
न्योछावर सारी खुशियाँ,
कर दूँ उसके कदमों पर,
जीवन के नवरंग आज,
भर दूं उनकी राहों पर।
सौगात प्रेम-रस में भीगी,
जीवन में भरे मिठास,
हौले से खुशियाँ खोलें,
प्रिय के सपनों का द्वार।
अरे, रंग में भिगो गए तुम,
स्वच्छ श्वेत परिधान।
कोरे कागज़ पर अंकित,
कर गए स्वयं का नाम।
आज प्रेम-आमंत्रण का,
टीका देकर मस्तक पर।
मेरे मन के कोने में,
हौले से दस्तक देकर,
दे गए प्रेम-सत्कार,
कर प्रणय-निवेदन आज।
हौले से खुशियाँ खोलें,
प्रिय के सपनों का द्वार।
———–*————–
मीनू जोशी
अल्मोड़ा

















